Edited By Sourabh Dubey, Updated: 04 Jan, 2026 02:13 PM

डूंगरपुर में हुई दिशा की बैठक के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। बीजेपी नेताओं की ओर से आरोप लगाए गए कि डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत ने उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत को जान से मारने की धमकी दी और बैठक में हंगामा किया।
डूंगरपुर (राजस्थान): डूंगरपुर में हुई दिशा की बैठक के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। बीजेपी नेताओं की ओर से आरोप लगाए गए कि डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत ने उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत को जान से मारने की धमकी दी और बैठक में हंगामा किया।
इन आरोपों को खारिज करते हुए सांसद राजकुमार रोत ने कहा कि यह पूरी तरह झूठा और मनगढ़ंत प्रचार है। उनका दावा है कि दिशा बैठक में न कोई धमकी दी गई और न ही किसी प्रकार की हाथापाई हुई, बल्कि जनता से जुड़े गंभीर मुद्दों पर चर्चा को जानबूझकर भटकाया गया।
राजकुमार रोत के मुताबिक दिशा बैठक का मकसद नरेगा, आंगनबाड़ी, मिड-डे मील, राजीविका महिला स्वयं सहायता समूह, जल जीवन मिशन और स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करना था। लेकिन जैसे ही इन योजनाओं में खामियों और जमीनी समस्याओं पर सवाल उठाए गए, बैठक में बार-बार टोका गया और चर्चा को रोकने की कोशिश की गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि नरेगा मजदूरों को 100 दिन का रोजगार नहीं मिलना, आंगनबाड़ी केंद्रों में शौचालय और भवनों की कमी, पैकिंग पोषाहार व दूध की गुणवत्ता, और स्वास्थ्य केंद्रों की बदहाल स्थिति जैसे मुद्दों को दबाने के लिए विवाद का माहौल बनाया गया।
राजकुमार रोत ने कहा कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों में विकास से जुड़े सवाल उठाने को ‘अलगाववाद’ और ‘सरकार विरोध’ से जोड़ना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने मीडिया से भी अपील की कि हंगामे और आरोपों के बजाय दिशा बैठक में उठे वास्तविक मुद्दों को जनता के सामने रखा जाए।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजस्थान की राजनीति में यह सवाल फिर खड़ा हो गया है कि क्या विकास से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाना अब राजनीतिक अपराध बनता जा रहा है।