राजस्थान का बढ़ा वैश्विक मान! दलाई लामा और मलाला जैसी हस्तियों की सूची में शामिल हुए डॉ. ईशान शिवानंद

Edited By Kuldeep Kundara, Updated: 10 Jul, 2026 05:22 PM

dr ishan shivanand joins ranks luminaries dalai lama and malala

राजस्थान के लिए गर्व की खबर है। मानसिक स्वास्थ्य शोधकर्ता और शिवयोग आचार्य डॉ. ईशान शिवानंद ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उनकी पुस्तक 'द प्रैक्टिस ऑफ इम्मोर्टलिटी' को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित नॉटिलस बुक अवार्ड में गोल्ड अवार्ड से...

जयपुर। राजस्थान के लिए गर्व की खबर है। मानसिक स्वास्थ्य शोधकर्ता और शिवयोग आचार्य डॉ. ईशान शिवानंद ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उनकी पुस्तक 'द प्रैक्टिस ऑफ इम्मोर्टलिटी' को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित नॉटिलस बुक अवार्ड में गोल्ड अवार्ड से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान पूर्वी अध्यात्म (Spirituality of Eastern Thought) श्रेणी में दिया गया है।

इस उपलब्धि के साथ डॉ. ईशान शिवानंद का नाम उन विश्वप्रसिद्ध हस्तियों की सूची में शामिल हो गया है, जिन्हें पहले यह सम्मान मिल चुका है। इस सूची में दलाई लामा, मलाला युसुफजई और एकहार्ट टोले जैसी वैश्विक हस्तियां शामिल हैं।

साधना और अनुभवों से जन्मी किताब
बताया गया कि 'द प्रैक्टिस ऑफ इम्मोर्टलिटी' केवल एक आध्यात्मिक पुस्तक नहीं, बल्कि डॉ. ईशान शिवानंद की वर्षों की साधना, अनुभव और शोध का सार है। उन्होंने अपने पिता और गुरु के मार्गदर्शन में प्राप्त ज्ञान को आगे बढ़ाते हुए 'योगा ऑफ इम्मोर्टल्स' पद्धति विकसित की, जिसे अब दुनिया के कई देशों में अपनाया जा रहा है।

वैज्ञानिक शोध में भी मिली पहचान
डॉ. ईशान शिवानंद का कहना है कि उनकी 'योगा ऑफ इम्मोर्टल्स' पद्धति पर किए गए कई वैज्ञानिक अध्ययन अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं, जिनमें इसके सकारात्मक प्रभावों का उल्लेख किया गया है। पिछले लगभग 20 वर्षों से वह शिवयोग कम्युनिटी के माध्यम से राजस्थान सहित देश-विदेश के लोगों को यह पद्धति सिखा रहे हैं।

रिलीज होते ही बनी बेस्टसेलर
मई 2025 में प्रकाशित होते ही 'द प्रैक्टिस ऑफ इम्मोर्टलिटी' ने लोकप्रियता के नए रिकॉर्ड बनाए। यह पुस्तक USA Today की नेशनल बेस्टसेलर सूची में शामिल हुई, जबकि भारत में लॉन्च के पहले ही सप्ताह में अमेजन पर नंबर-1 स्थान तक पहुंच गई। वर्तमान में यह पुस्तक 15 देशों में उपलब्ध है और हिंदी, मराठी समेत सात भाषाओं में इसका अनुवाद किया जा चुका है।

राजस्थान से जुड़े किसी लेखक और आध्यात्मिक शोधकर्ता का विश्वस्तरीय मंच पर इस तरह सम्मानित होना न केवल राज्य बल्कि पूरे देश के लिए गौरव की बात माना जा रहा है। यह उपलब्धि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और आधुनिक शोध के संगम को वैश्विक पहचान मिलने का भी संकेत देती है।

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