एसआईआर,बीएलओ दबाव पर राजस्थान के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवीन महाजन Exclusive

Edited By Sourabh Dubey, Updated: 27 Nov, 2025 08:42 PM

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राजस्थान के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवीन महाजन का बड़ा बयान, कहा - हमारे बीएलओ दबाव में नहीं, पहले दी ट्रेनिंग के कारण नए कीर्तिमान बना रहे. राजस्थान में 86 फीसदी की मैपिंग पूरी, सिर्फ दस-पन्द्रह फीसदी वोटर्स के दस्तावेजों की होगी जांच

देश के कई राज्यों की तरह राजस्थान में भी एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है. बीएलओ पर काम के दबाव से लेकर मतदाताओं के भ्रम और सियासी वार-पलटवार के बीच, चुनाव आयोग के राजस्थान मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवीन महाजन से पंजाब केसरी डिजिटल एडिटर विशाल सूर्यकांत ने बात की। पढ़िए इस चर्चा के प्रमुख अंश —

पंजाब केसरी: बीएलओ पर दवाब है, ख़ास कर ऑफलाइन फॉर्म भरने में फील्ड में काफी दिक्कतें आ रही हैं। काम के दबाव में जानें भी जा रही हैं, ये भी कहा जा रहा है। क्या ये बात आप तक पहुंची हैं?

नवीन महाजन: देखिए, कुछ चुनौतियां तो ज़रूर हैं, जिन्हें हम स्वीकार करते हैं। लेकिन ये भी समझना चाहिए कि जो समस्याएं आ रही हैं, वो इस काम में आना स्वाभाविक भी है। राजस्थान सामाजिक और आर्थिक विविधताओं वाला प्रदेश है। कई घरों में शिक्षा का स्तर कम है, कई जगह भाषा की बाधा है, और कई घरों में पहली बार इस तरह का सरकारी फॉर्म भरने का अनुभव हो रहा है। शुरू में थोड़ा समय लगा, लेकिन जैसे ही हमने स्थिति को समझा, हमने बीएलओ की सहायता के लिए अतिरिक्त स्टाफ जोड़ा; पहले से अनुभव रखने वाले कर्मचारियों को फील्ड में भेजा गया। इसके परिणामस्वरूप अब तक 86% इन्यूमरेशन फॉर्म्स न केवल एकत्र किए जा चुके हैं बल्कि डिजिटल सिस्टम पर अपलोड भी किए जा चुके हैं, जो एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।

 पंजाब केसरी: कुछ बीएलओ का कहना है कि जो लोग फॉर्म भर दे रहे हैं, उनकी स्क्रूटनी और अपलोडिंग के समय भी दोबारा-दो-तीन बार जाना पड़ रहा है क्योंकि जानकारियों का मिलान नहीं हो रहा और ऑनलाइन अपलोडिंग में दिक्कत आ रही है।

नवीन महाजन: हर परिवार में जानकारियाँ दर्ज करने की क्षमता अलग-अलग होती है। कुछ लोग विवरण बहुत अच्छी तरह देते हैं, कुछ अधूरी जानकारी छोड़ देते हैं। कुछ घरों में सदस्य बाहर काम पर गए होते हैं, इसलिए बार-बार जाना पड़ता है। लेकिन फिर भी, आज हमारी स्थिति यह है कि 9,000 से अधिक बीएलओ अपना 100% काम पूरा कर चुके हैं और लगभग 85% बीएलओ ने 90% से अधिक कार्य समाप्त कर दिया है। इतनी तेज प्रगति इस बात का संकेत है कि टीमवर्क, प्रशिक्षण और मॉनिटरिंग सही दिशा में काम कर रहे हैं।

पंजाब केसरी: राजस्थान में एसआईआर की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक पक्ष कैसा रहा है,  आपका अनुभव क्या रहा?

नवीन महाजन: देखिए, अब तक 78% मतदाताओं की सफलतापूर्वक मैपिंग हो चुकी है। इसका सीधा अर्थ यह है कि हर 10 में से 8 मतदाताओं को किसी भी प्रकार का दस्तावेज़ देने की जरूरत नहीं पड़ेगी और उनकी पात्रता स्वतः सुनिश्चित मानी जाएगी। यह प्रक्रिया न केवल सरल बनाती है, बल्कि फील्ड-लेवल पर लगने वाला समय भी काफी कम कर देती है। राजस्थान में एसआईआर प्रक्रिया अत्यंत व्यवस्थित और अपेक्षाकृत सहज ढंग से आगे बढ़ रही है। वर्तमान में जो गणना या इन्यूमरेशन चरण चल रहा है, उसमें राजस्थान देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। चाहे फॉर्म्स का वितरण हो, उनका डिजिटाइजेशन हो या प्रत्येक वोटर की मैपिंग का कार्य,  राजस्थान सभी मानकों पर बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। विशेष तौर पर मतदाताओं की मैपिंग एक महत्वपूर्ण घटक है: इसमें ‘‘मौजूदा वोटर’’ को 23 साल पहले की एसआईआर सूची के साथ जोड़ा जाता है, जिससे उनकी पहचान और पात्रता की पुष्टि हो सके।

पंजाब केसरी: जब आपने प्लानिंग शुरू की थी, कुछ पूर्वानुमान थे आपके?

नवीन महाजन : बिल्कुल। हमने शुरुआत में ही गहन योजना बनाई थी। एसआईआर प्रक्रिया के विधिवत लॉन्च से दो महीने पूर्व ही बीएलओ के प्रशिक्षण पर बड़ा निवेश किया गया था। उन्हें न केवल तकनीकी पहलुओं बल्कि फील्ड व्यवहार, घर-घर विजिट, शिष्टाचार, समय प्रबंधन और दस्तावेज़ समझने जैसी सूक्ष्म बातों की भी ट्रेनिंग दी गई थी। राजस्थान में मैं यह कह सकता हूँ कि हम मैपिंग, फॉर्म कलेक्शन और अपलोडिंग के मामलों में पूरे दस राज्यों में शीर्ष पर हैं।

पंजाब केसरी: एसआईआर की प्रक्रिया में बीएलओ जो सरकारी कर्मचारी हैं, जिनका मूल काम कुछ और है. क्या वे मतदाता की मर्जी और निर्वाचन विभाग के आदेशों में कहीं फंसे हुए तो नहीं?

नवीन महाजन: देखिए, पहला तो यह कि हमने एसआईआर की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही बीएलओ की ट्रेनिंग का सघन अभियान चलाया; उन्हें फील्ड की व्यावहारिक चुनौतियों के बारे में पहले से बता रखा है। प्रत्येक बीएलओ को हमने आईटी असिस्टेंट उपलब्ध करवाया। इसके अलावा मैपिंग के लिए राजस्व विभाग, पंचायत, नगरपालिका और नगर निगम के कर्मचारियों को तैनात किया गया। ये कर्मचारी बीएलओ की टीम के रूप में काम कर रहे हैं। जहाँ काम का दबाव अधिक था, वहाँ अतिरिक्त कर्मचारी लगाए गए ताकि बीएलओ को अकेला काम न करना पड़े। ध्यान यह रखा गया कि ‘‘एक बीएलओ, एक टीम’’ का मॉडल लागू हो। मुझे यह कहते हुए खुशी है कि राजस्थान के बीएलओ जिस कुशलता से काम कर रहे हैं, उन्हें अन्य राज्यों से भी तारीफ मिल रही है।

पंजाब केसरी: चलिए, अब वोटर्स की बात करते हैं जिन्हें साबित करना है कि वे 2002-03 में कहां थे। राजस्थान में आप कह रहे हैं कि गणना चरण में शानदार परफ़ॉर्मेंस रही, लेकिन वेरिफिकेशन में जहाँ दावे-आपत्तियाँ होंगी, वहाँ समस्याएं बढ़ सकती हैं। लोगों में भ्रम है कि क्या वोटर लिस्ट से नाम हमेशा के लिए कट जाएगा?

नवीन महाजन: ये जो भ्रम की स्थिति है, राजस्थान के संदर्भ में केवल 10–15% मतदाताओं में ही होगी; क्योंकि इतने ही प्रतिशत लोगों को दस्तावेज़ देने की जरूरत पड़ेगी। बाकी 85–90% को कोई दस्तावेज़ नहीं देना होगा, क्योंकि उनकी मैपिंग पहले ही सफलतापूर्वक हो चुकी है। इस प्रक्रिया के बाद जिनकी मैपिंग नहीं हुई है, उन्हें नोटिस दिया जाएगा. जो केवल ईआरओ द्वारा जारी होगा और फील्ड पर बीएलओ इसमें भी मुख्य भूमिका निभाएंगे। किसी को भी कलेक्टर या एसडीएम के ऑफिस नहीं दौड़ना पड़ेगा।

पंजाब केसरी: राजस्थान में प्रवासी बड़ी संख्या में हैं, क्या मैपिंग के चरण में उन लोगों से जुड़ी जानकारियाँ आई हैं?

नवीन महाजन: देखिए, जो लोग मजदूरी, नौकरी या व्यवसाय के कारण बाहर हैं, उन्हें दो विकल्प दिए गए हैं: वे देश के किसी भी हिस्से से ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं; यदि वे बाहर हैं तो उनके घर के सदस्य उनके behalf पर फॉर्म जमा कर सकते हैं, बशर्ते जानकारी सही हो। हमारी कोशिश रही है उन लोगों को सुविधा देना, पर साथ ही गलत सूचना देने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान भी है।

पंजाब केसरी: राजस्थान में 2011 की जनगणना के अनुसार करीब डेढ़ करोड़ लोग आदिवासी या घुमंतु-अर्ध-घुमंतू समुदायों से हैं , उनकी मैपिंग का काम कैसे किया गया?

नवीन महाजन: दक्षिण राजस्थान का टीएसपी क्षेत्र हमारी प्राथमिकता में था। कलेक्टर्स, एसडीएम और तहसीलदारों को निर्देश दिए गए कि ट्राइबल क्षेत्रों में मैपिंग विशेष अभियान के रूप में की जाए। परिणामस्वरूप इन्हीं क्षेत्रों में 80–90% मैपिंग दर्ज की गई — जो पूरे राज्य में सबसे उच्च है। इन समुदायों ने प्रशासन के साथ बहुत सहयोग किया।

पंजाब केसरी: इन सब प्रक्रियाओं के बाद भी अगर किसी का नाम छूट जाए तो क्या प्रावधान है?

नवीन महाजन: फॉर्म-6 हर नागरिक का अंतिम सुरक्षा कवच है। एसआईआर को वोटर-लिस्ट शुद्धिकरण अभियान समझें; इससे मतदाता के अधिकार पर कोई असर नहीं पड़ता। यदि कोई पात्र व्यक्ति छूट गया है, तो वह फॉर्म-6 के जरिए अपना नाम किसी भी समय जोड़ सकता है। यह प्रावधान सभी के लिए खुला और उपलब्ध है।

पंजाब केसरी: विपक्ष का आरोप है कि कुछ क्षेत्रों में वोटरों की संख्या जानबूझकर कम की जा रही है। आप कैसे देखते हैं?

नवीन महाजन: . मैं राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप पर टिप्पणी नहीं करूँगा। लेकिन यह जरूर कहूँगा कि पूरी प्रक्रिया में राजस्थान में एक लाख से ज्यादा बूथ-लेवल एजेंट तैनात हैं। राजस्थान में सभी प्रमुख और छोटे राजनीतिक दलों ने अपने एजेंट नियुक्त किए हैं। पूरी प्रक्रिया पब्लिक-डोमेन में हो रही है। वोटर ड्राफ्ट 9 दिसंबर को जारी होगा; उसके बाद एक माह क्लेम और ऑब्जेक्शन्स का समय रहेगा।

पंजाब केसरी: अन्य राज्यों में एसआईआर को लेकर काफी तनाव है — आपकी बात तो होती होगी बाकी राज्यों में?

नवीन महाजन: हाँ, जरूर; पर यह प्रत्येक राज्य की कार्यशैली पर निर्भर करता है। हम इसे अपना संवैधानिक दायित्व मानते हैं और पूरी गंभीरता तथा एकाग्रता के साथ निभाते हैं। मेरी राय में यह प्रक्रिया जितनी शांतिपूर्ण होगी, उतनी ही बेहतर होगी।

पंजाब केसरी: एसआईआर जैसी जटिल प्रक्रिया को आप पूरा कर रहे हैं; यकीनन काम की अधिकता है। ऐसे में क्या टेनिस अब भी रोज़ खेल पाते हैं?

नवीन महाजन: देखिए, टेनिस मेरा पैशन है और ऊर्जा का स्रोत भी। मैं खेल को सिर्फ फिटनेस के लिए नहीं, बल्कि मन और विचारों के संतुलन के लिए खेलता हूँ। खेल हमें सिखाता है कि तनाव को कैसे संभालें, निर्णयों की जिम्मेदारी कैसे लें, खुद को प्रतिदिन कैसे बेहतर करें और असफलता में भी सीख कैसे ढूँढें। मेरे लिए खेल जीवन का दर्शन है।

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