बजट Pulse 2026 : टैक्स सिस्टम, ओपीएस, रोज़गार और विकास को लेकर क्या है जनता का मन

Edited By Sourabh Dubey, Updated: 30 Jan, 2026 08:50 PM

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देश की आर्थिक दिशा तय करने वाला केंद्रीय बजट एक फ़रवरी को पेश होने जा रहा है। बजट से पहले देश के अलग–अलग वर्गों की उम्मीदें, आशंकाएँ और माँगें खुलकर सामने आ रही हैं।

जयपुर। देश की आर्थिक दिशा तय करने वाला केंद्रीय बजट एक फ़रवरी को पेश होने जा रहा है। बजट से पहले देश के अलग–अलग वर्गों की उम्मीदें, आशंकाएँ और माँगें खुलकर सामने आ रही हैं। इसी क्रम में पंजाब केसरी के मंच पर आयोजित विशेष परिचर्चा में अर्थशास्त्रियों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, कर्मचारियों, पेंशनर्स, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, ग्रामीण विकास, किसान और असंगठित क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने पंजाब केसरी डिजिटल एडिटर विशाल सूर्यकांत के साथ बजट को लेकर अपनी–अपनी अपेक्षाएँ रखीं।

वैश्विक चुनौतियों के बीच आ रहा है बजट

परिचर्चा की शुरुआत में वक्ताओं ने कहा कि यह बजट ऐसे समय में आ रहा है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापारिक चुनौतियाँ मौजूद हैं। निर्यात बढ़ाने, रोज़गार सृजन और आर्थिक संतुलन बनाए रखने की ज़िम्मेदारी सरकार के सामने है। वक्ताओं का मत था कि बजट को केवल घोषणाओं तक सीमित न रखकर ठोस नीतिगत दिशा देनी होगी।

निर्यात और वैश्विक व्यापार पर फोकस की ज़रूरत – कैलाश शर्मा, आर्थिक विश्लेषक व पत्रकार

वरिष्ठ पत्रकार और आर्थिक विश्लेषक कैलाश शर्मा ने कहा कि अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ, वैश्विक मंदी की आशंकाओं और भारत–यूरोपीय यूनियन व्यापार समझौते की पृष्ठभूमि में सरकार का मुख्य फोकस निर्यात बढ़ाने पर होना चाहिए।

उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार लैटिन अमेरिका, अफ्रीका, दक्षिण–पूर्व एशिया और मध्य एशिया जैसे नए बाज़ारों के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा कर सकती है।

कैलाश शर्मा ने कहा कि चीन पर बढ़ती निर्भरता भारत के लिए दीर्घकालिक ख़तरा है, इसलिए घरेलू उत्पादन, मैन्युफैक्चरिंग और वैल्यू एडिशन को बजट में प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

सरल और स्पष्ट टैक्स सिस्टम की माँग – सीए मोहित अग्रवाल

चार्टर्ड अकाउंटेंट मोहित अग्रवाल ने कहा कि आम करदाता बजट को सबसे पहले टैक्स राहत के नज़रिये से देखता है। उन्होंने कहा कि नए और पुराने टैक्स सिस्टम की जटिलता से आम लोग परेशान हैं। करदाता यह नहीं समझ पा रहा कि उसके लिए कौन–सा सिस्टम बेहतर है। उन्होंने एक सरल, सार्वभौमिक टैक्स व्यवस्था लाने की माँग की, जिसमें बेसिक छूट सीमा और स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाया जाए।

साथ ही उन्होंने लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स की छूट सीमा बढ़ाने, शॉर्ट टर्म टैक्स दर घटाने और सेक्शन ८०सी, ८०डी व २४बी जैसी कटौतियों की सीमा बढ़ाने की आवश्यकता बताई।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

कांग्रेस नेता राजेश कटारा ने कहा कि बजट आम आदमी केंद्रित होना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि निजीकरण, बढ़ते टैक्स और एफडीआई नीतियों के कारण छोटे व्यापारी और मध्यम वर्ग दबाव में हैं। टैक्स देने के बावजूद शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं में आम आदमी को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।

वहीं भाजपा नेता सीए सुरेश गर्ग ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि वर्ष 2024 के बाद बजट का आकार 16 लाख करोड़ से बढ़कर लगभग 50  लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। उन्होंने दावा किया कि इंफ्रास्ट्रक्चर, रोज़गार, सामाजिक योजनाओं और आयकर छूट में ऐतिहासिक बढ़ोतरी हुई है और इसका असर ज़मीन पर दिख रहा है।

कर्मचारियों और पेंशनर्स की चिंता

कर्मचारी संगठनों की ओर से पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बहाल करने की माँग प्रमुख रूप से उठी।
नर्सेज़ एसोसिएशन के जेपी कस्वां ने कहा कि नई पेंशन व्यवस्था के कारण कर्मचारियों का भविष्य असुरक्षित हो गया है।
संयुक्त कर्मचारी संघ के वरिष्ठ कर्मचारी नेता महावीर शर्मा ने आठवें वेतन आयोग को समय पर लागू करने और सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण पर रोक लगाने की माँग रखी।

पर्यटन उद्योग की उम्मीदें

राजस्थान होटल एसोसिएशन के राहुल अग्रवाल और अतुल गुप्ता ने कहा कि पर्यटन राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन केंद्र से मिलने वाला बजट अपर्याप्त है। उन्होंने एक हज़ार रुपये से कम किराये वाले होटलों पर जीएसटी शून्य करने, विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए वीज़ा नीति में सुधार और अंतरराष्ट्रीय मार्केटिंग को मज़बूत करने की माँग रखी।

जेम्स–ज्वेलरी सेक्टर की माँग

जेम्स–ज्वेलरी एसोसिएशन के प्रतिनिधि डीडी गर्ग ने जेम्स–ज्वेलरी पर तीन प्रतिशत जीएसटी को घटाकर एक प्रतिशत करने और कस्टम ड्यूटी कम करने की माँग की। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र निर्यात और रोज़गार दोनों में महत्वपूर्ण योगदान देता है, लेकिन कर बोझ के कारण प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो रही है।

शिक्षा, खेल और युवा मुद्दे

शिक्षाविदों ने शिक्षा बजट को सकल घरेलू उत्पाद के छह प्रतिशत तक बढ़ाने की माँग दोहराई। सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षकों की कमी, शोध के लिए सीमित फंडिंग और बुनियादी ढांचे की कमी पर चिंता जताई गई।  मर्शल आर्ट्स एकेडमी चला रहीं खिलाड़ी रिचा गौड़ ने कहा कि स्कूल और कॉलेज स्तर पर खेल सुविधाएँ मज़बूत की जानी चाहिए और लंबित खेल नौकरियाँ भरी जानी चाहिए।

युवाओं की आवाज़ बने अप्लव सक्सेना ने कहा कि वे देश की पैंसठ से सत्तर प्रतिशत युवा आबादी की चिंताओं को सामने रख रहे हैं।

उन्होंने गुणवत्तापूर्ण और किफायती शिक्षा, ग्रीन एनर्जी, आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और कृषि जैसे भविष्य के क्षेत्रों में छात्रवृत्ति व निःशुल्क प्रमाणन कार्यक्रम शुरू करने की माँग की। उन्होंने रोज़गार को युवाओं की सबसे बड़ी प्राथमिकता बताते हुए भारत का अपना वैश्विक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म विकसित करने की आवश्यकता बताई।

महिलाओं की “दूसरी पारी” पर ध्यान दे सरकार – आदिप सक्सेना

आदिप सक्सेना ने कहा कि बड़ी संख्या में महिलाएँ तीस से पैंतीस वर्ष की उम्र के बाद करियर शुरू करती हैं, लेकिन नीतियाँ इस सच्चाई को नहीं दर्शातीं। उन्होंने महिलाओं के लिए दूसरी पारी में करियर के अवसर, छोटी बचत योजनाओं पर बेहतर ब्याज और समान वेतन क़ानून के प्रभावी क्रियान्वयन की माँग की।

स्वास्थ्य क्षेत्र की माँग

राजस्थान नर्सेज़ यूनियन के अध्यक्ष महिपाल समोता ने कहा कि कोरोना काल ने स्वास्थ्य क्षेत्र की अहमियत साबित कर दी।
उन्होंने सकल घरेलू उत्पाद का कम से कम पाँच प्रतिशत स्वास्थ्य पर खर्च करने, डिजिटल हेल्थ को मज़बूत करने और नर्सों व पैरामेडिक्स को सम्मानजनक वेतन देने की माँग रखी।

गिग वर्कर्स और टैक्सी ड्राइवर्स

धरम सिंह योगी ने कहा कि गिग वर्कर्स को न तो सामाजिक सुरक्षा मिलती है और न ही बीमा।
संजय सिंह रतनू ने कहा कि सरकारी नीतियाँ काग़ज़ों में ही रह जाती हैं और न्यूनतम किराया आज भी लागू नहीं हो पाया है।

ग्रामीण विकास और किसान

राजस्थान सरपंच संघ के प्रदेशाध्यक्ष बंशीधर गढ़वाल ने कहा कि पंचायतों को समय पर फंड, जल जीवन मिशन के लिए पर्याप्त संसाधन और मनरेगा का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। किसानों ने सस्ती बिजली, खाद–बीज, बेहतर बुनियादी ढांचे और किसान निधि को लेकर विशेष ध्यान देने की उम्मीद जताई।

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