Edited By Anil Jangid, Updated: 18 Jan, 2026 05:11 PM

जयपुर: जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF 2026) में अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक सुरक्षा को लेकर गहन विमर्श देखने को मिला। इसी क्रम में “ए कॉन्टिनेंट इन क्राइसिस: रशिया, यूक्रेन एंड द यूरोपियन स्टोरी” सत्र के दौरान पोलैंड के उप प्रधानमंत्री राडोस्लाव...
जयपुर: जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF 2026) में अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक सुरक्षा को लेकर गहन विमर्श देखने को मिला। इसी क्रम में “ए कॉन्टिनेंट इन क्राइसिस: रशिया, यूक्रेन एंड द यूरोपियन स्टोरी” सत्र के दौरान पोलैंड के उप प्रधानमंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की ने रूस-यूक्रेन युद्ध और यूरोप पर उसके प्रभाव को लेकर बेबाक राय रखी। उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को अहंकारी बताते हुए कहा कि पुतिन अपने अहम को आगे रखकर अन्य देशों पर प्रहार कर रहे हैं, जिसका असर पूरी दुनिया की जियो-पॉलिटिक्स पर पड़ रहा है।
सिकोरस्की ने कहा कि यूक्रेन का पड़ोसी देश होने के कारण पोलैंड पर इस युद्ध का सीधा प्रभाव पड़ा है। अर्थव्यवस्था से लेकर सामाजिक ढांचे तक कई क्षेत्रों में इसका असर देखने को मिल रहा है। लाखों यूक्रेनी शरणार्थी पोलैंड आए हैं, जिनके लिए शिविर, आवास, भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा की व्यवस्था करनी पड़ी है। इससे पोलैंड पर आर्थिक और प्रशासनिक दबाव बढ़ा है, लेकिन मानवीय आधार पर देश ने हरसंभव सहयोग किया है।
उन्होंने रूस-चीन के बढ़ते संबंधों पर भी चिंता जताई। सिकोरस्की के अनुसार, रूस धीरे-धीरे चीन पर आर्थिक रूप से निर्भर होता जा रहा है और अपनी राष्ट्रीय संपदा चीनी उत्पादों पर खर्च कर रहा है। यह स्थिति रूस के दीर्घकालिक हितों के खिलाफ है, क्योंकि चीन अपनी आर्थिक शक्ति के जरिए रूस पर राजनीतिक प्रभाव बना सकता है।
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा गारंटी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने 1994 के बुडापेस्ट मेमोरेंडम का जिक्र किया, जब यूक्रेन ने दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा परमाणु शस्त्रागार छोड़ दिया था। इसके बदले उसकी सुरक्षा की गारंटी दी गई थी, लेकिन आज उसी देश की सीमाओं का उल्लंघन हो रहा है। इससे अंतरराष्ट्रीय भरोसे और सुरक्षा समझौतों की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।
नाटो और यूरोप की सुरक्षा पर बोलते हुए सिकोरस्की ने कहा कि अब यूरोपीय देशों को अपनी रक्षा क्षमताएं बढ़ानी होंगी। पोलैंड समेत कई देशों ने रक्षा बजट बढ़ाया है और यूक्रेन को सैन्य सहायता दी है। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के संदर्भ में कहा कि अमेरिका-यूरोप संबंधों में उतार-चढ़ाव आते रहे हैं, इसलिए यूरोप को अपनी सुरक्षा के लिए आत्मनिर्भर बनना होगा।
युद्ध को लेकर उन्होंने कहा कि पुतिन ने इसे तीन दिन का “स्पेशल ऑपरेशन” समझा था, लेकिन यह वर्षों लंबा खिंच गया। इस युद्ध में रूस को भारी सैन्य और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है, जबकि यूक्रेन और पूरे यूरोप की स्थिरता भी प्रभावित हुई है।