Edited By Anil Jangid, Updated: 19 Jan, 2026 01:19 PM

जयपुर। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026 के अंतर्गत आयोजित सत्र “The Spirit of Place” में साहित्य और लेखन में स्थान की भूमिका पर एक विचारोत्तेजक चर्चा देखने को मिली। इस सत्र का आयोजन पंजाब केसरी राजस्थान और नवोदय टाइम्स द्वारा किया गया।
जयपुर। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026 के अंतर्गत आयोजित सत्र “The Spirit of Place” में साहित्य और लेखन में स्थान की भूमिका पर एक विचारोत्तेजक चर्चा देखने को मिली। इस सत्र का आयोजन पंजाब केसरी राजस्थान और नवोदय टाइम्स द्वारा किया गया। सत्र में प्रसिद्ध लेखक रुचिर जोशी, राहुल भट्टाचार्य, राणा दासगुप्ता और जेफ डायर ने भाग लिया, जबकि बातचीत का संचालन जानी-मानी प्रकाशक चिकी सरकार ने किया। यह सत्र जयपुर के क्लार्क्स अमेर स्थित चारबाग स्थल पर आयोजित हुआ।
क्या हर लेखन स्थान से जुड़ा होता है?
चर्चा की शुरुआत इस विचार से हुई कि क्या कोई भी किताब स्थान से मुक्त हो सकती है? चिकी सरकार ने सवाल उठाया कि चाहे वह फिक्शन हो या नॉन-फिक्शन, लेखन में स्थान उतना ही जरूरी है जितना जीवन के लिए सांस। इस पर लेखक जेफ डायर ने प्रसिद्ध फोटोग्राफर माइकल एकरमैन के कथन का ज़िक्र किया— “Place doesn’t exist, only my idea of it exists.” डायर के अनुसार, स्थान एक भौगोलिक इकाई नहीं बल्कि लेखक की subjectivity यानी उसकी अनुभूति से बनता है।
भाषा भी एक स्थान है
लेखक राहुल भट्टाचार्य ने कहा कि स्थान केवल भूगोल नहीं, बल्कि भाषा भी है। उन्होंने गुयाना और मुंबई के उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे स्थानीय शब्द, मौसम के वर्णन और बोलचाल की भाषा किसी जगह की आत्मा को रचती है। उन्होंने कहा कि कुछ रचनाएँ—जैसे सैमुअल बेकेट का Endgame—जानबूझकर स्थान को मिटाने की कोशिश करती हैं, लेकिन वह अपवाद हैं।
समय और स्थान का रिश्ता
लेखक राणा दासगुप्ता ने चर्चा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि स्थान को समय से अलग नहीं किया जा सकता। उन्होंने अपने लेखन में एयरपोर्ट, मॉल और हाईवे जैसे “Non-Places” की अवधारणा पर बात की, जहां लोग होते हैं लेकिन अपनापन नहीं। उनके अनुसार आज की दुनिया दो ध्रुवों में बंटी है— वे लोग जो लगातार यात्रा कर सकते हैं और वे जो कभी अपने स्थान से बाहर नहीं जा पाते दोनों ही तरह के अनुभव साहित्य में महत्वपूर्ण हैं।
कोलकाता, इतिहास और स्मृति
लेखक रुचिर जोशी ने बताया कि उनके लिए स्थान और समय एक-दूसरे में घुले हुए हैं। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के समय के कोलकाता पर आधारित अपने उपन्यास के शोध अनुभव साझा किए और कहा कि शहर वही रहता है, लेकिन उसकी आत्मा बदल जाती है। उनका मानना है कि लेखक अक्सर किसी स्थान को छोड़ने के बाद ही उस पर लिख पाता है।
रेलवे, शहर और सपने
राहुल भट्टाचार्य ने अपने नए उपन्यास का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे भारतीय रेलवे उनके लिए एक भौतिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक स्थान है— जो लोगों को उनके सपनों, मजबूरियों और महत्वाकांक्षाओं से जोड़ता है। उन्होंने मुंबई को “strugglers” का शहर बताया—जहां हर व्यक्ति अपने जीवन की फिल्म का हीरो बनना चाहता है।
पाठकों की पसंदीदा किताबें
सत्र के अंत में दर्शकों ने लेखकों से ऐसी किताबों की सिफारिश मांगी जो स्थान की भावना को बेहतरीन तरीके से पकड़ती हों।
लेखकों ने जिन कृतियों का उल्लेख किया, उनमें शामिल थीं— Season of Migration to the North (तैयब सालेह) बर्लिन और यूरोप पर आधारित क्लासिक जासूसी उपन्यास
“The Spirit of Place” सत्र ने यह स्पष्ट किया कि साहित्य में स्थान केवल पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि एक जीवित पात्र होता है। लेखन में स्थान, समय, भाषा और स्मृति—चारों मिलकर उस आत्मा को जन्म देते हैं जिसे पाठक महसूस करता है। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026 का यह सत्र साहित्य प्रेमियों के लिए न सिर्फ बौद्धिक, बल्कि भावनात्मक अनुभव भी रहा।