Edited By Sourabh Dubey, Updated: 12 Jul, 2026 04:10 PM
अभाविप राजस्थान ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत को ज्ञापन सौंपकर छात्रावासों के पुनर्निर्माण, डिजिटल सुविधाओं के विस्तार और लंबित छात्रवृत्ति के समयबद्ध भुगतान की मांग की।
जयपुर। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) राजस्थान ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अंतर्गत संचालित छात्रावासों की स्थिति में सुधार, लंबित छात्रवृत्तियों के समयबद्ध भुगतान और विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग को लेकर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत को विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
परिषद ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए विद्यार्थियों को समय पर छात्रवृत्ति, सुरक्षित एवं सुविधायुक्त छात्रावास और आधुनिक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से विभिन्न विद्यार्थी हितों से जुड़े मुद्दों को ज्ञापन में प्रमुखता से उठाया गया।
लंबित छात्रवृत्ति के जल्द भुगतान की मांग
अभाविप ने बताया कि प्रदेश के कई पात्र विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति लंबे समय से लंबित है। आवेदन प्रक्रिया के दौरान तकनीकी समस्याएं और महाविद्यालय स्तर की त्रुटियों के कारण कई छात्र योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते हैं।
परिषद ने मांग की कि आगामी शैक्षणिक सत्र से छात्रवृत्ति आवेदन प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए। साथ ही एससी पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति में आधार सीडिंग से जुड़ी तकनीकी समस्याओं का शीघ्र समाधान करते हुए केंद्र और राज्य सरकार की लंबित छात्रवृत्ति राशि का जल्द भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
जर्जर छात्रावासों के पुनर्निर्माण की मांग
अभाविप द्वारा किए गए छात्रावास सर्वेक्षण का हवाला देते हुए ज्ञापन में कहा गया कि प्रदेश के कई छात्रावासों की स्थिति अत्यंत जर्जर है। भवनों की खराब हालत, पेयजल, स्वच्छता, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई और सुरक्षा प्रभावित हो रही है।
परिषद ने सभी जर्जर छात्रावासों के पुनर्निर्माण, आधुनिकीकरण और नियमित रखरखाव के लिए विशेष बजट का प्रावधान करने की मांग की। इसके साथ ही डूंगरपुर स्थित भासोर छात्रावास और बूचियावाड़ा बालिका छात्रावास सहित अन्य जर्जर छात्रावासों के पुनर्निर्माण को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।
डिजिटल छात्रावास विकसित करने पर जोर
अभाविप ने सभी छात्रावासों को चरणबद्ध तरीके से डिजिटल बनाने का सुझाव दिया। परिषद ने स्मार्ट ई-लाइब्रेरी, कंप्यूटर लैब, इंटरनेट सुविधा और आधुनिक डिजिटल अध्ययन संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को भी प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी का अवसर मिल सके।
खेल सुविधाओं और व्यक्तित्व विकास पर भी जोर
ज्ञापन में कहा गया कि छात्रावास केवल रहने की व्यवस्था तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का केंद्र बनने चाहिए। इसके लिए सभी छात्रावासों में खेल मैदान, खेल सामग्री और नियमित खेल गतिविधियों की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई।
इसके अलावा छात्रावासों में व्यक्तित्व विकास, राष्ट्रभाव और सांस्कृतिक चेतना को बढ़ावा देने के लिए "छात्रावास वंदे मातरम् अभियान" चलाने तथा भारत और राजस्थान के महापुरुषों, स्वतंत्रता सेनानियों, संतों एवं समाज सुधारकों की जयंती और पुण्यतिथि पर वार्षिक गतिविधि कैलेंडर तैयार करने का सुझाव भी दिया गया।
विद्यार्थी हितों के मुद्दों पर लगातार सक्रिय है अभाविप
अभाविप ने कहा कि परिषद अपनी स्थापना से ही प्रवेश, परीक्षा, परिणाम, छात्रावास, छात्रवृत्ति और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा जैसे विद्यार्थी हितों के मुद्दों पर लगातार कार्य करती रही है। यह ज्ञापन भी प्रदेश के हजारों विद्यार्थियों की समस्याओं और अपेक्षाओं को सरकार तक पहुंचाने का एक सकारात्मक प्रयास है।
इस दौरान अभाविप के राष्ट्रीय मंत्री हर्षित ननोमा, क्षेत्रीय संगठन मंत्री अश्वनी शर्मा, जयपुर प्रांत मंत्री शुभेद्र सिंह, जोधपुर प्रांत मंत्री दशरथ गर्ग तथा चित्तौड़ प्रांत मंत्री जितेंद्र लोधा मौजूद रहे।
परिषद ने उम्मीद जताई कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग विद्यार्थियों के हित में इन सुझावों पर सकारात्मक निर्णय लेकर छात्रावास व्यवस्था और छात्रवृत्ति प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाएगा.