जोधपुर में डॉग बाइट के बढ़ते मामले: 12 दिनों में 629 लोग घायल, सर्दियों में क्यों बढ़ता है खतरा?

Edited By Anil Jangid, Updated: 14 Jan, 2026 04:09 PM

rising dog bite cases in jodhpur 629 injured in 12 days winter risks explained

जोधपुर। शहर में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे आमजन में चिंता का माहौल है। प्रमुख महात्मा गांधी हॉस्पिटल (MGH) में इन दिनों डॉग बाइट के रोजाना औसतन 50 से अधिक मामले सामने आ रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, पिछले महज 12 दिनों...

जोधपुर। शहर में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे आमजन में चिंता का माहौल है। प्रमुख महात्मा गांधी हॉस्पिटल (MGH) में इन दिनों डॉग बाइट के रोजाना औसतन 50 से अधिक मामले सामने आ रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, पिछले महज 12 दिनों में ही 629 लोग कुत्तों के हमले का शिकार हो चुके हैं, जबकि बीते तीन वर्षों में यह औसत प्रतिदिन 30 से 35 मामलों का रहा है।

 

ग्रामीण क्षेत्रों से भी जोधपुर पहुंच रहे मरीज
MGH जोधपुर डॉग बाइट के उपचार का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। ग्रामीण इलाकों और शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी-रेबीज इंजेक्शन और टीकाकरण की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण 70 से 100 किलोमीटर दूर-दराज के गांवों से भी मरीज जोधपुर पहुंचने को मजबूर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य केंद्रों पर ही इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाए, तो मरीजों को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सकता है।

 

साल-दर-साल बढ़ते आंकड़े
बीते तीन वर्षों के आंकड़े डॉग बाइट की बढ़ती समस्या को स्पष्ट करते हैं।

2023: 10,615 मामले
2024: 10,968 मामले
2025: 13,198 मामले
इन आंकड़ों से साफ है कि हर साल डॉग बाइट के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है।

 

सर्दियों में क्यों बढ़ता है खतरा?
सर्दियों के मौसम में डॉग बाइट के मामले बढ़ जाते हैं। ठंड के कारण कुत्तों का व्यवहार अधिक आक्रामक हो सकता है और लोग भी ज्यादा कपड़ों में ढके होने से उन्हें समय पर देख नहीं पाते, जिससे हमले की आशंका बढ़ जाती है।

 

डॉग बाइट होने पर क्या करें?
कुत्ते के काटने पर घाव को 10 से 15 मिनट तक बहते पानी से अच्छी तरह धोएं। जितनी जल्दी हो सके मरीज को अस्पताल ले जाएं, ताकि एंटी-रेबीज इंजेक्शन और आवश्यक उपचार शुरू किया जा सके। घाव पर मिर्ची, हल्दी या घरेलू नुस्खे लगाने से बचें, ये संक्रमण को बढ़ा सकते हैं।

 

प्रशासन और समाज की भूमिका जरूरी
लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग को आवारा कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण और निगरानी पर गंभीरता से काम करना होगा। साथ ही, आमजन को भी सतर्क रहने और सही समय पर इलाज कराने के प्रति जागरूक होना आवश्यक है। डॉग बाइट की यह बढ़ती समस्या केवल स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि जनसुरक्षा से भी जुड़ा गंभीर मुद्दा बनती जा रही है।

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