Edited By Anil Jangid, Updated: 25 Feb, 2026 02:01 PM

जोधपुर: जोधपुर मंडल ने रेल सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए नॉन-इंटरलॉक्ड समपार फाटकों (एलसी गेट) पर पहली बार सीसीटीवी आधारित निगरानी प्रणाली शुरू की है। यह पहल उत्तर पश्चिम रेलवे के तहत अपनी तरह का पहला नवाचार मानी जा...
जोधपुर: जोधपुर मंडल ने रेल सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए नॉन-इंटरलॉक्ड समपार फाटकों (एलसी गेट) पर पहली बार सीसीटीवी आधारित निगरानी प्रणाली शुरू की है। यह पहल उत्तर पश्चिम रेलवे के तहत अपनी तरह का पहला नवाचार मानी जा रही है।
मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी के अनुसार, इस प्रणाली से संवेदनशील और मानव रहित फाटकों की गतिविधियों पर सटीक और रियल टाइम नजर रखी जा सकेगी, जिससे सुरक्षा मानकों में उल्लेखनीय सुधार होगा।
परियोजना के पहले चरण में तिंवरी-ओसियां सेक्शन के एलसी गेट संख्या-37 और जाजीवाल-आसारानाडा सेक्शन के एलसी गेट संख्या-152 को शामिल किया गया है। इन फाटकों का चयन इनके ट्रेन-व्हीकल यूनिट (TVU) आंकड़ों के आधार पर किया गया है, जो 10 हजार से कम है। यह संपूर्ण प्रणाली Research Designs and Standards Organisation (RDSO) के निर्धारित मानकों के अनुरूप विकसित की गई है।
प्रत्येक चयनित फाटक पर चार हाई-डेफिनिशन फिक्स्ड सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जो गेट क्षेत्र की हर गतिविधि को रिकॉर्ड करेंगे। इन कैमरों को संबंधित स्टेशनों से सीधे जोड़ा गया है। स्टेशन पर 24 इंच के मॉनिटर, सीपीयू और मजबूत नेटवर्क कनेक्टिविटी की व्यवस्था की गई है, जिससे स्टेशन मास्टर ट्रेन संचालन के दौरान यह सुनिश्चित कर सकें कि फाटक समय पर और पूरी तरह बंद हुआ है या नहीं।
रेलवे बोर्ड के निर्देशानुसार मंडल स्तर पर इंजीनियरिंग कंट्रोल ऑफिस में भी एक केंद्रीकृत मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित किया गया है। इससे मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी सीधे फाटकों की स्थिति की निगरानी कर सकेंगे।
इस तकनीकी पहल का उद्देश्य केवल रेल परिचालन को पारदर्शी बनाना नहीं है, बल्कि सड़क उपयोगकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। फाटकों पर नियमों के उल्लंघन या वाहन फंसने जैसी घटनाएं अक्सर बड़े हादसों का कारण बनती हैं। सीसीटीवी आधारित निगरानी प्रणाली से ऐसी स्थितियों पर तुरंत कार्रवाई संभव होगी और दुर्घटनाओं की आशंका को कम किया जा सकेगा।
रेलवे प्रशासन की योजना है कि इस मॉडल को भविष्य में मंडल के अन्य संवेदनशील समपार फाटकों पर भी लागू किया जाए, ताकि पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके।