Edited By Anil Jangid, Updated: 15 Jan, 2026 07:31 PM

जोधपुर। राजस्थान की राजनीति के सबसे अहम केंद्रों में शुमार जोधपुर में गुरुवार को ऐसा राजनीतिक दृश्य देखने को मिला, जिसने कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी की चर्चाओं को एक नई दिशा दे दी। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह जिले और उनके मजबूत गढ़ माने...
जोधपुर। राजस्थान की राजनीति के सबसे अहम केंद्रों में शुमार जोधपुर में गुरुवार को ऐसा राजनीतिक दृश्य देखने को मिला, जिसने कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी की चर्चाओं को एक नई दिशा दे दी। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह जिले और उनके मजबूत गढ़ माने जाने वाले जोधपुर में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट के दौरे ने सियासी हलचल तेज कर दी। पायलट के स्वागत में उमड़ा जनसैलाब और गूंजते नारों ने यह साफ संकेत दे दिया कि प्रदेश की राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी है।
जैसे ही सचिन पायलट जोधपुर एयरपोर्ट पहुंचे, वहां का नजारा किसी बड़े शक्ति प्रदर्शन से कम नहीं था। चारों ओर कार्यकर्ताओं का हुजूम, हाथों में झंडे और जुबान पर नारे— “अगला सीएम कैसा हो, सचिन पायलट जैसा हो”— ने पूरे माहौल को गर्मा दिया। एयरपोर्ट परिसर कांग्रेस समर्थकों के जोश और उत्साह से गूंज उठा, जिसने यह संदेश दिया कि पायलट की लोकप्रियता केवल जयपुर या पूर्वी राजस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि गहलोत के प्रभाव क्षेत्र में भी उनकी मजबूत पकड़ बनती दिख रही है।
पायलट के स्वागत के लिए कांग्रेस के कई बड़े चेहरे एयरपोर्ट पर मौजूद रहे। इनमें करण सिंह उचियाड़ा, पूर्व चिकित्सा मंत्री राजेंद्र चौधरी और राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष निर्मल चौधरी प्रमुख रूप से शामिल थे। खास बात यह रही कि बड़ी संख्या में युवा कार्यकर्ता भी पायलट की एक झलक पाने को उत्साहित नजर आए। युवाओं की मौजूदगी ने यह स्पष्ट कर दिया कि पार्टी का युवा वर्ग पायलट को भविष्य के नेतृत्व के रूप में देख रहा है।
इस दौरे का सबसे अहम और राजनीतिक रूप से संकेतात्मक पहलू यह रहा कि जोधपुर, जिसे लंबे समय से अशोक गहलोत का अभेद्य किला माना जाता है, वहां गुटबाजी की दीवारें कुछ हद तक कमजोर पड़ती दिखीं। एयरपोर्ट पर केवल पायलट समर्थक ही नहीं, बल्कि गहलोत गुट से जुड़े कई नेता भी सचिन पायलट के स्वागत में पहुंचे। दोनों गुटों का एक मंच पर आना और साझा स्वागत करना कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में बदलते समीकरणों की ओर इशारा करता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरा केवल औपचारिक नहीं था, बल्कि इसके जरिए पार्टी के भीतर एकजुटता और संतुलन का संदेश देने की कोशिश भी की गई। विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस नए सिरे से संगठन को मजबूत करने की दिशा में बढ़ रही है और ऐसे में जोधपुर जैसे गढ़ में पायलट की मजबूत मौजूदगी कई राजनीतिक संकेत छोड़ गई है।
कुल मिलाकर, जोधपुर में सचिन पायलट का यह दौरा केवल स्वागत समारोह नहीं, बल्कि राजस्थान कांग्रेस की आने वाली रणनीति और नेतृत्व संतुलन की झलक भी माना जा रहा है। यह साफ है कि आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में पायलट की भूमिका और ज्यादा मुखर होती नजर आ सकती है।