Edited By Afjal Khan, Updated: 23 Feb, 2026 06:13 PM

ग्रामीण जीवन की आधारशिला मानी जाने वाली ओरण भूमि और खेजड़ी के पेड़ों की सुरक्षा के मुद्दे पर आंदोलन अब तेज होता नजर आ रहा है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से निकली पदयात्राएं सोमवार को जोधपुर पहुंचीं। बड़ी संख्या में ग्रामीणों, किसानों, पर्यावरण...
ग्रामीण जीवन की आधारशिला मानी जाने वाली ओरण भूमि और खेजड़ी के पेड़ों की सुरक्षा के मुद्दे पर आंदोलन अब तेज होता नजर आ रहा है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से निकली पदयात्राएं सोमवार को जोधपुर पहुंचीं। बड़ी संख्या में ग्रामीणों, किसानों, पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने इसमें भागीदारी निभाई।
हाथों में तख्तियां और बैनर लिए प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां संभागीय आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर ओरण भूमि पर हो रहे अतिक्रमण पर रोक लगाने, खेजड़ी के पेड़ों की कटाई पर सख्ती से प्रतिबंध लगाने और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की गई।
पदयात्रा का नेतृत्व कर रहे सुमेर सिंह सांवरा ने कहा कि ओरण और देव भूमि केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि ग्रामीण संस्कृति, आस्था और आजीविका का आधार है। इसे बचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो धैर्य की परीक्षा न ली जाए। जरूरत पड़ी तो आंदोलन को जयपुर तक ले जाकर घेराव किया जाएगा। उन्होंने पूर्व और वर्तमान सरकारों पर भी ओरण भूमि के संरक्षण में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया।
पांच दर्शन जूना अखाड़े के संगठन मंत्री और सिवाना मठ के श्री महंत सत्यम गिरी महाराज ने मांग रखी कि ओरण भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का अतिक्रमण या विवाद न हो सके।
आंदोलन में मारवाड़ राजपूत सभा के अध्यक्ष हनुमान सिंह खांगटा, बिश्नोई समाज के प्रतिनिधि परसराम बिश्नोई, जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के निवर्तमान छात्रसंघ अध्यक्ष अरविंद सिंह भाटी और छात्र नेता मोती सिंह जोधा सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोग मौजूद रहे।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो यह मुहिम और व्यापक रूप ले सकती है।