जयपुर में McDonald’s रेस्तरां पर फूड सेफ्टी की कार्रवाई, खराब तेल में तली जा रही थी फ्रेंच फ्राइज!

Edited By Payal Choudhary, Updated: 10 Feb, 2026 02:42 PM

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राजस्थान की राजधानी जयपुर में खाद्य सुरक्षा विभाग ने शुद्ध आहार–मिलावट पर वार अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई की है। इस कार्रवाई में गौरव टावर स्थित McDonald's रेस्तरां भी शामिल है, जहां जांच के दौरान सामने आया कि फ्रेंच फ्राइज और अन्य खाद्य पदार्थ...

शुद्ध आहार–मिलावट पर वार अभियान के तहत गौरव टावर स्थित दो रेस्टोरेंट्स पर छापा, 100 किलो से अधिक दूषित सामग्री नष्ट

राजस्थान की राजधानी जयपुर में खाद्य सुरक्षा विभाग ने शुद्ध आहार–मिलावट पर वार अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए नामी फास्ट फूड चेन McDonald's सहित दो रेस्टोरेंट्स पर छापा मारा। जांच के दौरान सामने आया कि मैकडॉनल्ड्स रेस्तरां में फ्रेंच फ्राइज और अन्य खाद्य पदार्थ अत्यधिक खराब और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक तेल में तले जा रहे थे। मौके पर ही फूड सेफ्टी टीम ने दूषित तेल और सड़ी-गली खाद्य सामग्री नष्ट करवाई और आगे की कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

गौरव टावर स्थित रेस्टोरेंट्स पर हुई कार्रवाई

यह कार्रवाई जयपुर के व्यस्त मॉल गौरव टावर में स्थित दो रेस्टोरेंट्स पर की गई। आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण राजस्थान के निर्देश पर सीएमएचओ जयपुर द्वितीय की फूड सेफ्टी टीम ने निरीक्षण के दौरान रेस्टोरेंट्स के किचन, कोल्ड स्टोरेज और खाद्य तेल की गुणवत्ता की जांच की। जांच में कई गंभीर खामियां सामने आईं, जिसके बाद तुरंत कार्रवाई करते हुए दूषित खाद्य सामग्री नष्ट करवाई गई।

खाद्य तेल का TPC खतरनाक स्तर पर पाया गया

निरीक्षण के दौरान सबसे गंभीर मामला खाद्य तेल की गुणवत्ता को लेकर सामने आया। अधिकारियों के अनुसार, जिस रिफाइंड पामोलीन तेल में फ्रेंच फ्राइज और अन्य खाद्य पदार्थ तले जा रहे थे, उसका TPC (Total Polar Compounds) निर्धारित अधिकतम सीमा 25 से काफी अधिक पाया गया। नॉन-वेज फ्राइंग ऑयल का TPC 28 और वेज फ्राइंग ऑयल का TPC 31 दर्ज किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, TPC का इतना अधिक होना तेल के विषाक्त होने का संकेत है, जिससे कैंसर कारक तत्व, ट्रांस फैट और हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है।

40 लीटर दूषित तेल मौके पर ही नष्ट

फूड सेफ्टी टीम ने पाया कि उपयोग में लिया जा रहा तेल अत्यधिक काला और अनुपयोगी हो चुका था, इसके बावजूद उसे करीब 150 डिग्री सेल्सियस पर गर्म कर सुबह से रात तक उसी में फ्राइंग की जा रही थी। टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए लगभग 40 लीटर दूषित तेल मौके पर ही नष्ट करवाया। रेस्टोरेंट मैनेजर को तुरंत प्रभाव से फ्रेश तेल उपयोग में लेने के निर्देश दिए गए और खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत इंप्रूवमेंट नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू की गई।

कोल्ड रूम से मिले सड़े-गले टमाटर

जांच के दौरान रेस्टोरेंट के कोल्ड रूम में प्लास्टिक की कैरेट में रखे सड़े-गले टमाटर भी पाए गए। करीब 40 किलो खराब टमाटर मौके पर ही नष्ट करवाए गए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस तरह की लापरवाही सीधे तौर पर उपभोक्ताओं की सेहत के साथ खिलवाड़ है और इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अन्य रेस्टोरेंट पर भी कार्रवाई

इसी अभियान के तहत एक अन्य रेस्टोरेंट “चाट का चस्का” पर भी कार्रवाई की गई, जहां से लगभग 25 किलो दूषित खाद्य सामग्री नष्ट करवाई गई और खाद्य तेल का नमूना जांच के लिए लिया गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उपभोक्ताओं के लिए बड़ा अलर्ट

खाद्य सुरक्षा विभाग की यह कार्रवाई साफ संदेश देती है कि चाहे रेस्टोरेंट बड़ा ब्रांड हो या छोटा ढाबा, अगर खाद्य गुणवत्ता से समझौता किया गया तो सख्त कार्रवाई तय है। यह मामला उपभोक्ताओं के लिए भी चेतावनी है कि सिर्फ ब्रांड के नाम पर भरोसा न करें और खाने की गुणवत्ता को लेकर सजग रहें। विभाग ने स्पष्ट किया है कि शुद्ध आहार–मिलावट पर वार अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।

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