जयपुर में लोक और समकालीन कला का अद्भुत संगम, राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में जुटे 14 राज्यों के कलाकार

Edited By LUCKY SHARMA, Updated: 31 May, 2026 09:00 AM

folk and contemporary art camp begins at rajasthan international centre jaipur

राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में 5 दिवसीय फोक एंड कंटेम्परेरी आर्ट कैंप शुरू, देशभर की दुर्लभ लोक, जनजातीय और आधुनिक कला परंपराएं एक मंच पर

Jaipur: राजस्थान की राजधानी जयपुर इन दिनों कला और संस्कृति के एक अनूठे संगम की साक्षी बन रही है। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC) में 1 जून से 5 जून 2026 तक आयोजित "फोक एंड कंटेम्परेरी आर्ट कैंप" में देश के 14 राज्यों से आए 20 प्रतिष्ठित कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (WZCC), उदयपुर और राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह पांच दिवसीय कला शिविर भारतीय लोक, पारंपरिक, जनजातीय और समकालीन कला को एक साझा मंच प्रदान कर रहा है।

इस विशेष कला शिविर का उद्देश्य सदियों पुरानी भारतीय कला परंपराओं और आधुनिक कला के बीच सार्थक संवाद स्थापित करना है। कैंप में 10 समकालीन कलाकार और 10 लोक एवं पारंपरिक कला विशेषज्ञ एक साथ सृजन कर रहे हैं, जिससे दर्शकों को भारतीय कला की विविधता और समृद्धि को करीब से देखने का अवसर मिल रहा है।

इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां कई ऐसी कला विधाएं प्रदर्शित की जा रही हैं जिनसे राजस्थान के अधिकांश दर्शक अब तक परिचित नहीं रहे हैं। इनमें कई कला परंपराएं ऐसी हैं जो चार से पांच पीढ़ियों से लगातार संरक्षित होती आ रही हैं। कला प्रेमियों को कलाकारों को लाइव काम करते देखने और उनकी तकनीकों को समझने का दुर्लभ अवसर प्राप्त हो रहा है।

कैंप में पद्मश्री सम्मानित कलाकार परेश राठवा (पिथोरा कला, गुजरात), शाकिर अली (मुगल मिनिएचर कला, राजस्थान) और दुलारी देवी (मधुबनी कला, बिहार) विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इसके अलावा गोंड कला की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ा रहे प्रसिद्ध कलाकार मयंक श्याम भी अपनी कलाकृतियों के माध्यम से दर्शकों को आकर्षित कर रहे हैं।

समकालीन कला खंड में देश के कई प्रतिष्ठित कलाकार शामिल हैं। इनमें सुब्रत मंडल, नंदलाल ठाकुर, मुरली चीरोथ, पी.सी. किशन, चरण शर्मा, दिलीप शर्मा, प्रमोद आर्य, रामगोपाल खुमावत, केतकी राय चौधरी और डॉ. चन्द्रशेखर सैन प्रमुख हैं। इन कलाकारों के कार्य भारतीय परंपराओं और आधुनिक कलात्मक अभिव्यक्तियों का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।

लोक एवं पारंपरिक कला वर्ग में राजस्थान के वरिष्ठ मिनिएचर कलाकार समुद्र सिंह खंगारोत, असम के मुखौटा कला विशेषज्ञ खगेन गोस्वामी, पश्चिम बंगाल के भास्कर चित्रकार (कालीघाट चित्रकला) और बिहार की नाजिदा खातून (सिक्की कला) सहित कई कलाकार अपनी विशिष्ट कला परंपराओं का प्रदर्शन कर रहे हैं।

इस कला शिविर की संकल्पना एवं क्यूरेशन राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर की क्यूरेटर निकहत अंसारी द्वारा किया गया है। उनका उद्देश्य भारत की समृद्ध कला विरासत और समकालीन कला के बीच एक मजबूत सेतु तैयार करना है, जिससे कलाकारों और दर्शकों के बीच संवाद को बढ़ावा मिल सके।

ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान आयोजित यह कला शिविर विद्यार्थियों, शोधार्थियों, कला प्रेमियों और परिवारों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। आयोजकों ने सभी नागरिकों से इस अनूठे कला महोत्सव में शामिल होकर भारतीय कला की हजारों वर्षों पुरानी विरासत को करीब से जानने और समझने का आग्रह किया है।

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