राजसमंद में CRPF जवान रहस्यमयी ढंग से लापता, 18 दिन बाद भी नहीं मिला कोई सुराग

Edited By Anil Jangid, Updated: 14 Jan, 2026 04:51 PM

crpf jawan goes missing in rajsamand 18 days no clue

राजसमंद। देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा में तैनात एक जांबाज जवान जब छुट्टी लेकर अपने घर लौटने के लिए निकलता है, तो परिवार खुशियों के पल गिनने लगता है। लेकिन राजस्थान के राजसमंद जिले के भीम कस्बे के प्रजापत परिवार के लिए यह इंतज़ार अब 18 दिनों से...

राजसमंद। देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा में तैनात एक जांबाज जवान जब छुट्टी लेकर अपने घर लौटने के लिए निकलता है, तो परिवार खुशियों के पल गिनने लगता है। लेकिन राजस्थान के राजसमंद जिले के भीम कस्बे के प्रजापत परिवार के लिए यह इंतज़ार अब 18 दिनों से अंतहीन चिंता और आंसुओं में बदल चुका है। मध्य प्रदेश के नीमच में तैनात सीआरपीएफ कांस्टेबल नंदकिशोर प्रजापत रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हो गए हैं और अब तक उनका कोई सुराग नहीं लग पाया है।

 

27 दिसंबर को निकले थे घर के लिए
परिजनों के अनुसार नंदकिशोर प्रजापत ने 27 दिसंबर 2025 को 50 दिनों की छुट्टी स्वीकृत करवाई थी। वे नीमच स्थित सीआरपीएफ कैंप से अपने घर भीम आने वाले थे। परिवार की उनसे आखिरी बार 26 दिसंबर को बातचीत हुई थी। इसके बाद उनका मोबाइल नंबर (94077-09906) लगातार बंद आ रहा है। चिंता तब और गहरी हो गई जब उनके एक परिचित मांगीलाल ने परिवार को फोन कर बताया कि नंदकिशोर का मोबाइल फोन और सारा निजी सामान अभी भी सीआरपीएफ कैंप में ही पड़ा हुआ है।

 

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    कैंप से नहीं मिले संतोषजनक जवाब
    जानकारी मिलते ही नंदकिशोर के पुत्र पंकज प्रजापत और भतीजे पवन नीमच कैंप पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि वहां उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। कैंप अधिकारियों ने सिर्फ इतना कहा कि नंदकिशोर आधिकारिक रूप से छुट्टी पर गए हैं। भाई महेंद्र प्रजापत का कहना है कि उन्हें केवल एक गेट का सीसीटीवी फुटेज दिखाया गया और यह कहकर पल्ला झाड़ लिया गया कि “अगर वे 50 दिन बाद ड्यूटी पर नहीं लौटते, तब कार्रवाई की जाएगी।”

     

    पुलिस में दर्ज करवाई गुमशुदगी
    परिवार ने नीमच थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई है, लेकिन 18 दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस को कोई ठोस सुराग नहीं मिला है। परिजनों का कहना है कि जांच की गति बेहद धीमी है और मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।

     

    परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
    भीम कस्बे में नंदकिशोर के घर पर हालात बेहद भावुक हैं। उनकी 70 वर्षीय बुजुर्ग मां, पत्नी और बच्चे सदमे में हैं। घर में हर आहट पर उम्मीद जागती है, लेकिन हर दिन मायूसी ही हाथ लगती है। परिवार के मन में कई सवाल उठ रहे हैं—अगर नंदकिशोर कैंप से निकले थे तो उनका मोबाइल और सामान वहीं कैसे रह गया? और अगर रास्ते में कोई अनहोनी हुई है तो अब तक कोई सुराग क्यों नहीं मिला?

     

    सरकार से लगाई मदद की गुहार
    परिजनों ने राजस्थान और मध्य प्रदेश सरकार के साथ-साथ सीआरपीएफ के उच्च अधिकारियों से मामले में हस्तक्षेप कर त्वरित और गंभीर जांच की मांग की है। देश की सुरक्षा में तैनात एक जवान का इस तरह लापता होना न केवल परिवार, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि नंदकिशोर प्रजापत सुरक्षित मिलेंगे या इस रहस्य से कब पर्दा उठेगा।

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