राजसमंद में बढ़ता वाहन प्रदूषण: नियम कागजों में कैद, शहर की हवा बन रही जहरीली

Edited By Anil Jangid, Updated: 26 Feb, 2026 05:35 PM

vehicle pollution rises in rajsamand regulations on paper air becomes toxic

राजसमंद। शहर की सड़कों पर बढ़ते धुएं और उड़ती धूल ने नागरिकों की जीवनशैली को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। पहले जहां पुराने ऑटो और बसों को प्रदूषण का मुख्य कारण माना जाता था, वहीं अब नए वाहन भी समय पर सर्विस न होने और बिना पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल...

राजसमंद। शहर की सड़कों पर बढ़ते धुएं और उड़ती धूल ने नागरिकों की जीवनशैली को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। पहले जहां पुराने ऑटो और बसों को प्रदूषण का मुख्य कारण माना जाता था, वहीं अब नए वाहन भी समय पर सर्विस न होने और बिना पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (पीयूसी) प्रमाण-पत्र के चलने के कारण हवा को दूषित करने लगे हैं। इससे शहर की वायु गुणवत्ता लगातार गिर रही है और आमजन की परेशानियां बढ़ रही हैं।

 

शहर के कई व्यस्त इलाकों जैसे टीवीए चौराहा, कलक्ट्री रोड, राजनगर और भीलवाड़ा हाईवे में प्रदूषण की स्थिति अधिक गंभीर है। सुबह और शाम के समय वाहनों से निकलने वाला धुआं वातावरण में फैलकर लोगों को सांस लेने में कठिनाई पैदा करता है। कई पुराने वाहन नियमित फिटनेस जांच से नहीं गुजरते, जबकि नए वाहन भी समय पर सर्विस न होने के कारण अधिक धुआं छोड़ते हैं। परिणामस्वरूप हवा दिन-प्रतिदिन जहरीली होती जा रही है।

 

डॉक्टरों का कहना है कि लगातार बढ़ते प्रदूषण से स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। बच्चों, बुजुर्गों और दमा के मरीजों के लिए स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है। प्रदूषित हवा में लंबे समय तक रहने से एलर्जी, ब्रोंकाइटिस और अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञ इसे शहरी स्वास्थ्य संकट के रूप में देख रहे हैं।

 

हालांकि वाहनों के लिए फिटनेस जांच और पीयूसी प्रमाण-पत्र अनिवार्य हैं, लेकिन शहर में इन नियमों का पालन प्रभावी रूप से नहीं हो पा रहा। जांच अभियान सीमित हैं और निगरानी व्यवस्था कमजोर होने के कारण बिना फिटनेस और बिना पीयूसी वाले वाहन आसानी से सड़कों पर दौड़ रहे हैं।

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि रोजाना स्कूल जाने वाले बच्चे, कामकाजी लोग और बुजुर्ग प्रदूषित हवा में सांस लेने को मजबूर हैं। लगातार बढ़ते धुएं और धूल ने शहरवासियों की दिनचर्या और स्वास्थ्य पर गहरा असर डाला है। बावजूद इसके, समस्या के समाधान के लिए ठोस और नियमित कार्रवाई अब भी अधूरी नजर आ रही है।

 

विशेषज्ञों ने चेताया है कि अगर जल्द ही प्रभावी निगरानी और नियमों का पालन सुनिश्चित नहीं किया गया, तो राजसमंद की हवा और अधिक जहरीली हो जाएगी और शहरी स्वास्थ्य संकट गंभीर रूप ले सकता है।

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