राजसमंद में स्कूल परिसरों की सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य, शिक्षा विभाग ने जारी किए आदेश

Edited By Anil Jangid, Updated: 01 Mar, 2026 05:05 PM

school campus security audit mandatory in rajsamand education department

राजसमंद। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों को पढ़ाई के अतिरिक्त कई अन्य जिम्मेदारियां निभानी पड़ती रही हैं, जिनका उल्लेख बीएड या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में नहीं होता। पहले शिक्षकों को छात्रों को दूध पिलाने और ऑनलाइन कार्यों में मदद करने जैसी...

राजसमंद। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों को पढ़ाई के अतिरिक्त कई अन्य जिम्मेदारियां निभानी पड़ती रही हैं, जिनका उल्लेख बीएड या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में नहीं होता। पहले शिक्षकों को छात्रों को दूध पिलाने और ऑनलाइन कार्यों में मदद करने जैसी जिम्मेदारियां दी गई थीं। गत माह उन्हें स्कूल परिसरों में कुत्तों को भगाने का कार्य भी सौंपा गया था। अब शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों और स्कूल परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करने की नई जिम्मेदारी शिक्षकों को दी है।

 

शिक्षा विभाग ने सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने स्कूल परिसर का सुरक्षा ऑडिट कराएं। इस ऑडिट में चारदीवारी, विद्यालय प्रवेश द्वार, रसोईघर और मिड-डे-मील निर्माण क्षेत्र, पानी निकासी के आउटलेट, नालियां और परिसर में खुले स्थानों की स्थिति का निरीक्षण किया जाएगा। आवश्यकतानुसार मरम्मत का कार्य सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि किसी प्रकार की सुरक्षा चूक न हो।

 

विशेष रूप से प्राथमिक और प्री-प्राइमरी कक्षाओं के बच्चों की स्कूल परिसर में आवाजाही पर निगरानी रखी जाएगी। मध्यान्तर अवकाश और छुट्टी के समय शारीरिक शिक्षक या अन्य शिक्षक की अनिवार्य ड्यूटी लगाई जाएगी। इस दौरान बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी होगी, ताकि अभिभावकों का विद्यालय पर विश्वास मजबूत बना रहे।

 

सुरक्षा ऑडिट में अब स्कूल परिसर या आसपास मौजूद जीव-जंतुओं से संभावित खतरे का भी आकलन शामिल किया गया है। शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने प्रदेश के सभी संयुक्त निदेशकों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। यदि परिसर में किसी जीव-जंतु की मौजूदगी से बच्चों को खतरा हो सकता है, तो शिक्षकों को स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर सुरक्षा व्यवस्था करनी होगी।

 

इस नई पहल का उद्देश्य स्कूल परिसरों को सुरक्षित बनाना, बच्चों को किसी भी अप्रिय घटना से बचाना और अभिभावकों का भरोसा बनाए रखना है। विशेषज्ञों के अनुसार, सुरक्षा ऑडिट और निगरानी व्यवस्था से न केवल छात्रों की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि शिक्षकों और प्रशासन की जवाबदेही भी मजबूत होगी। इस कदम से प्रदेश के स्कूलों में सुरक्षा मानकों को उच्च स्तर पर लाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।

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