Special Interview: सतीश पूनियां और अलका गुर्जर को टिकट के बाद बोले राजेंद्र राठौड़: 'पार्टी मांगने से नहीं देती पार्टी अपने आप ही देती है'

Edited By Anil Jangid, Updated: 08 Jun, 2026 10:58 AM

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जयपुर। राजस्थान में राज्यसभा चुनावों को लेकर बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है। बीजेपी ने सतीश पूनिया और अलका गुर्जर को अपना प्रत्याशी बनाया है। जिसके बाद से बीजेपी के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ के सियासी भविष्य...

जयपुर। राजस्थान में राज्यसभा चुनावों को लेकर बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है। बीजेपी ने सतीश पूनिया और अलका गुर्जर को अपना प्रत्याशी बनाया है। जिसके बाद से बीजेपी के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ के सियासी भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे है। इन्ही तमाम सवालों पर पंजाब केसरी राजस्थान के संपादक विशाल सूर्यकांत ने राजेंद्र राठौड़ के साथ खास बातचीत की है, पढ़िए इंटरव्यू।

सवाल: 
लोगों को बहुत उम्मीदें थी की राज्यसभा चुनावों में राजेंद्र सिंह राठौड़ का नाम आएगा, क्या कहना है? 

जवाब: 
देखिए हमारा संगठन हमारी पार्टी अपने आदर्श पर चलने वाली पार्टी है। योग्य से योग्यतम लोगों का चयन करती है। जिन दोनों उम्मीदवारों का चयन हुआ है वो दोनों कुशल संगठनकर्ता रहे। उनके उनको उनकी सामाजिक और राजनीतिक पैठ बहुत गहरी रही। एक विचार के साथ बड़ा लंबा संघर्ष रहा। दोनों ने अलग-अलग प्रदेशों में कोई अंदाजा नहीं लगा सकता था कि हरियाणा में सरकार रिपीट होगी। दिल्ली में सरकार आपको हराकर सरकार बनेगी। दोनों ने अदित्य काम किया। इसलिए जो जिनका चयन होना चाहिए था उन्हीं का चयन हुआ है और मैं तो बड़ा खुश हूं कि दोनों दोनों योग्यतम व्यक्ति यहां से गए हैं। जिनका बड़ा राजनीतिक और सामाजिक आधार है। राजस्थान की बेबुद्धि के लिए राजस्थान के विकास के लिए सतीश जी और कल अलका जी दोनों मिलकर काम करेंगे। रही बात मेरी मैंने कभी पार्टी में ना तो कहा हमारी यह पार्टी कार्यकर्ता को हर कार्यकर्ता पर 360 डिग्री के कैमरे से देखती है और जहां जरूरत पड़ती है जिस लायक कार्यकर्ता हो उसी लायक उसको काम देती है उन दोनों के लायक यह काम था राज्यसभा में राजस्थान की पैरवी करने दिल्ली की राजनीति के अंदर उनकी जरूरत थी हमारे नेतृत्व ने जो किया उनका स्वागत और मुझे कतई इस चीज का मलाल नहीं कि मेरा हुआ कि नहीं हुआ ना ही मैंने कभी अपना नाम आगे बढ़ाया था पार्टी मांगने से नहीं देती पार्टी अपने आप ही देती है।


सवाल:
आपने कहा योग्य योग्यतम और योग्य की बात कही है आपने अगर संसदीय परंपराओं के लिहाज से अनुभव से कहें तो राजेंद्र राठौड़ साहब नेता प्रतिपक्ष रहे हैं एक लंबा आपका अनुभव रहा है और पार्टी के अंदर भी आपका जुड़ाव है वह पहले से किसी रूप में कम नहीं है। आप मतलब यह मॉडेस्ट हो रहे हैं इस पूरे मामले में या आपको वाकई लगता है कि नहीं वो ज्यादा डिर्विंग थे?

जवाब: 
नहीं निश्चित तौर पर दोनों ज्यादा डिजर्विंग है। दोनों का एक-एक सूबे को जीतना बहुत बड़ी बात है। सतीश जी ने प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए राजस्थान के में इस जो जिस सरकार में अभी हम सत्ता में बैठे हैं, उसको लाने में बड़ी महत्व भूमिका निभाई है। अलका जी का बहुत बड़ा योगदान रहा है और फिर जब पूरे देश के अंदर नारी संवर्धन की बात आ रही है। आरक्षण के द्वारा नारियों को आगे बह विधानसभा और लोकसभा में ले जाने की बात मोदी जी कर रहे हैं तो राज्यसभा में भी उचित प्रतिनिधित्व होना चाहिए। इसलिए उचित समय पर उचित निर्णय हुआ है। 

सवाल:
लेकिन आपने राज्यों की बात की राज्यों के अंदर भूमिका निभाई दिल्ली के अंदर हरियाणा में। आपने भी तो पश्चिम बंगाल में वहां पर अह बहुत जोरदार तरीके से चुनाव लड़ा। खुद वहां के मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने जीत के बाद बयान में आपका नाम और आपके आपकी टीम का जिक्र किया।

जवाब:
यह बंगाल के मुख्यमंत्री जी की सहर देता है। हमारा योगदान गिलेहरी का जिस प्रकार रामसेतु में योगदान था उससे भी कम योगदान रहा। जीत मोदी जी के विश्वास की थी। जीत अमित शाह साहब की रणनीति की थी। जीत शुभेंदु अधिकारी के खुद की पैठ और साख और संघर्ष की थी। हम तो सिर्फ एक नेपथ्य में रहकर छोटा-मोटा काम कर रहे थे। पर उनका बड़ा मन था। इसलिए उन्होंने इस इस तरह की बात कह दी। अह मुझे कतई गुमान नहीं कि बंगाल के चुनाव में, भवानीपुर के चुनाव में अगर मैं नहीं होता तो न जाने क्या हो जाता। असंख्य कार्यकर्ता लंबे समय से लग रहे थे। उनका बलिदान था और टीएमसी की सरकार से लोग तरस थे। इसलिए बदलाव हुआ है। 

सवाल:
मुख्यमंत्री जो पद का उम्मीदवार जीतने के बाद पहले रिएक्शन में अगर राजस्थान की किसी नेता का नाम ले रहे हैं। तो स्वाभाविक तौर पे राजस्थान में जो आपके समर्थक हैं तमाम लोगों के अंदर एक भावना तो जागती थी कि राजेंद्र राठौड़ जी के लिए कोई ओहदा या एक नई जिम्मेदारी एक तरह से रिवाइव होगा। जिस तरह सतीश पूनियां हरियाणा से जाके रिवाइव हुए। इसी तरह से आपका नाम भी चल रहा था।

जवाब:
देखिए यहां का एक-एक कार्यकर्ता मुझे अच्छी तरह से जानता है। मेरे संसदीय जीवन को भी जानता है। सत्ता में रहते हुए प्रतिपक्ष में रहते हुए जानता है। उनको पता है मेरी फितरत का कि मैं कभी पदों के हिसाब से चलने वाला व्यक्ति नहीं हूं। मैं तो चरविते चरविते काम करने वाला आदमी हूं और काम में अभी भी कोई कमी नहीं। आज भी इस सरकार में सरकार में बैठे सभी मंत्री लोगों को जब मैं कहता हूं तो मेरी बात को गंभीरता से सुनते हैं। मुख्यमंत्री जी का अथा विश्वास मुझ पर है। मुख्यमंत्री जी मुझसे कई बार कुछ काम मुझे देते भी हैं। इसलिए मुझे समय-समय पर काम मिलता रहेगा और मैं काम करता रहूंगा।

सवाल:
ये कास्ट इक्वेशन है वो ज्यादा प्रबल हुई क्या? क्योंकि सोशल मीडिया पे लगातार यह बात चल रही है कि राजेंद्र राठौड़ जी हैं। वो कास्ट इक्वेशन में कहीं पीछे रह गए या
पीछे रह रहे हैं। और जो आपके आपको लेकर जो लगातार बात हो रही है उसमें यह भी है कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण और इन तमाम लोगों को लेकर शायद आपने उतनी मुखरता से बात नहीं रखी। उसका आपको बेनिफिट नहीं मिला। आपने अपने आप को एक कम्युनिटी का लीडर है। उस रूप में ज्यादा प्रबलता से नहीं दिया।

जवाब:
नहीं भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता की संस्कृति में जाति आधार कभी रहा ही नहीं। जाति हमारी सामाजिक बंधन हो सकता है पर जाति के आधार पर निर्णय कभी हुए नहीं। सोशल इंजीनियरिंग की बात कुछ हो सकती है पर जातियों के आधार पर निर्णय नहीं होना और नहीं करना यह भारतीय जनता पार्टी की संस्कृति रही है और इसी नाते मैं नहीं समझता कि इस कारण से कोई योग्य और कोई अयोग्य होगा। योग्य व्यक्ति में कई योग्यता रहती है। उन दोनों में योग्यताओं की कोई कमी नहीं थी। इसलिए उनका उनका चयन हुआ।

सवाल:
लोग कह रहे हैं प्रदेश अध्यक्ष और अब नईनई भूमिका आप देख रहे हैं कि अब और क्या हो सकता है।

जवाब:
राजन राठौड़ जी मेरी मेरी अभिलाषा बिल्कुल नहीं है। मैं पहले भी नहीं हूं। मैं तो सिर्फ एक कार्यकर्ता और बरसों से काम करने वाले कार्यकर्ता के रूप में सम्मान चाहता हूं जो मुझे मिल रहा है। मैं पूर्णत संतुष्ट हूं। मुझे किसी तरह की कोई मांग नहीं। प्रदेश अध्यक्ष के पद पर भी मैं अपने आप को अयोग्य मैं महसूस करता हूं। मेरी मेरी वहां योग्यता उस संगठन के रूप में उस तरह की भूमिका जिस तरह की होनी चाहिए उस तरह की सक्रियता रही नहीं कभी। इसलिए मुझे कोई किसी चीज़ की आवश्यकता नहीं।

सवाल:
कई लोग दावा कर रहे थे किरोड़ी जी और वो उनके भाई के लिए टिकट की बात थी। कई तरह की मतलब कई नेता हैं उनकी महत्वाकांक्षा जागी थी। आप जिस तरह से अपनी बात रख रहे हैं। क्या आप पॉलिटिकल मैसेज देना चाहते हैं उन तमाम महत्वाकांक्षा रखने वाले लोगों के लिए समर्थकों को?

जवाब:
देखिए यह भारतीय जनता पार्टी का शीर्ष नेतृत्व है। 360 डिग्री कैमरे से हम सब कार्यकर्ताओं के काम को देखता है। काम को तवज्जा मिलती है। विचार को तवज्जा मिलती है। संस्कार को और कार्य संस्कृति को सम्मान मिलता है। हर कार्यकर्ता को काम यह भारतीय जनता पार्टी का नेतृत्व देखता है और समय पर देता है। इसलिए किसी तरह की आकांक्षा पालकर मन में किसी प्रकार की हीनता हीन भावना नहीं रखनी चाहिए और पार्टी के साथ अपने सिद्धांत और नीति के अनुसार चरवेते चरबते के आधार पर चलते रहना चाहिए। यही मेरी निवेदन है।

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