Edited By Anil Jangid, Updated: 20 Jul, 2026 02:09 PM

जयपुर। लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे सोनम वांगचुक के प्रदर्शन पर जयपुर के भाजपा विधायक बालमुकुंदाचार्य ने प्रतिक्रिया दी है।
जयपुर। लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे सोनम वांगचुक के प्रदर्शन पर जयपुर के भाजपा विधायक बालमुकुंदाचार्य ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन किसी भी तरह की देश विरोधी गतिविधियों को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनके आंदोलन को समर्थन देने के लिए देश के कई हिस्सों से लोग दिल्ली पहुंच रहे हैं। इसी को लेकर विधायक बालमुकुंदाचार्य ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें वांगचुक के आंदोलन से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन प्रदर्शन के दौरान हुई कुछ गतिविधियां चिंता का विषय हैं।
विधायक ने कहा कि सभी नागरिकों को अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाने का अधिकार है, लेकिन प्रदर्शन के नाम पर यदि किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक या देश विरोधी गतिविधियां होती हैं तो उन्हें बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन स्थल पर कुछ लोगों द्वारा आपत्तिजनक नारे लगाए गए और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणियां की गईं।
बालमुकुंदाचार्य ने कहा कि देश की एकता, संस्कृति और धार्मिक भावनाओं का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन की पहचान उसके उद्देश्य और तरीके से होती है, इसलिए विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण और मर्यादित होना चाहिए।
वहीं, सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। दिल्ली हाई कोर्ट में उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर सुनवाई भी हुई। केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि लंबे समय तक भूख हड़ताल के कारण उनकी तबीयत खराब हुई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
वांगचुक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में कहा कि उन्हें अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने का अधिकार है और वह मेदांता अस्पताल जाना चाहते हैं।
सोनम वांगचुक कई दिनों से भूख हड़ताल पर हैं और इस दौरान उनका वजन भी काफी कम हुआ है। उनके समर्थकों का कहना है कि वह शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सुधार की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। वहीं, राजनीतिक स्तर पर उनके आंदोलन को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।