MLA हरीश चौधरी ने की ग्राउंड जीरो से रिपोर्टिंग, 11 करोड़ के अस्पताल की ऐसे खोली पोल

Edited By Anil Jangid, Updated: 29 Jul, 2026 05:56 PM

mla harish choudhary exposes reality of rs 11 crore hospital

जयपुर। राजस्थान के बाड़मेर जिले की बायतु विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री हरीश चौधरी ने राज्य की भजनलाल सरकार पर एकबार फिर धावा बोला है। उन्होंने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए एक वीडियो जारी किया है।

जयपुर। राजस्थान के बाड़मेर जिले की बायतु विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री हरीश चौधरी ने राज्य की भजनलाल सरकार पर एकबार फिर धावा बोला है। उन्होंने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए एक वीडियो जारी किया है। जिसमें खुद विधायक ने एक ग्राउंड रिपोर्टर की भूमिका में उप-जिला अस्पताल बायतु की जमीनी स्थिति की रिपोर्टिंग की है। बायतु में स्थानीय जनता और मरीजों के बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए 11 करोड़ रूपये की भारी-भरकम लागत से एक आधुनिक और विशाल उप-जिला अस्पताल का ढांचा पूरी तरह बनकर तैयार हुआ है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासनिक ढिलाई और राजनीतिक खींचतान के कारण अस्पताल की नई इमारत पर ताले लटके हुए हैं। ऐसे में विधायक हरीश चौधरी ने जनता की इस बेसिक समस्या को राजस्थान के स्वास्थ्य तंत्र की बदहाली का बड़ा उदाहरण बताया है।

 

हरीश चौधरी ने इस उप-जिला अस्पताल का निरीक्षण करते हुए इस वीडियो में दिखाया है कि किस तरह सरकार और प्रशासन की अनदेखी का खामियाजा क्षेत्र की निर्दोष जनता को भुगतना पड़ रहा है। बायतु और आसपास के ग्रामीण इलाकों की सुविधाओं के लिए 11 करोड़ रूपये की लागत से उप-जिला अस्पताल की आधुनिक और भव्य इमारत का निर्माण पूरा किया जा चुका है। अस्पताल की इमारत पूरी तरह तैयार होने और उसमें जरूरी संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद इस पर ताले लगा दिए गए हैं, जिससे करोड़ों की सरकारी संपत्ति धूल खा रही है।

 

विधायक चौधरीन  ने बताया कि बायतु क्षेत्र के गरीबों, किसानों और आम नागरिकों को छोटे-मोटे इलाज या आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी 50 से 150 किलोमीटर दूर बाड़मेर जिला अस्पताल या जोधपुर के अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इससे मरीजों का समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहे हैं।

 

इस वीडियो में हरीश चौधरी ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के कागजी दावों की भी जमकर पोल खोली। चौधरी ने कहा कि सरकार के मंत्री और स्वास्थ्य विभाग के अफसर केवल बैठकों और कागजों में विकास के दावे कर रहे हैं, जबकि धरातल पर स्थितियां बिल्कुल अलग हैं। ऐसे में उन्होंने तुरंत प्रभाव से अस्पताल में पर्याप्त डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और मेडिकल सुविधाएं बहाल कर इसे आम जनता के लिए खोलने की मांग की है। हालांकि, यह वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने भी बंद अस्पताल को जल्द चालू करने की मांग को लेकर अपना विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया है।

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