मंडियों में गिरावट का संकट: वैश्विक तनाव से नागौर का जीरा और ग्वार गम के दाम धड़ाम

Edited By Anil Jangid, Updated: 02 Apr, 2026 02:35 PM

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नागौर: राजस्थान की कृषि मंडियों में इन दिनों गहरी चिंता और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। नागौर, जोधपुर और बीकानेर संभाग के किसान और व्यापारी वैश्विक हालात के कारण भारी आर्थिक दबाव झेल रहे हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध जैसे...

नागौर: राजस्थान की कृषि मंडियों में इन दिनों गहरी चिंता और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। नागौर, जोधपुर और बीकानेर संभाग के किसान और व्यापारी वैश्विक हालात के कारण भारी आर्थिक दबाव झेल रहे हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध जैसे हालात का सीधा असर अब स्थानीय कृषि उत्पादों पर साफ दिखाई दे रहा है।

 

विशेष रूप से नागौर का विश्व प्रसिद्ध जीरा और जोधपुर का ग्वार गम, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़ी मांग रहती है, इस समय भारी गिरावट का सामना कर रहे हैं। खाड़ी देशों में चल रहे संघर्ष के कारण समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ है, जिससे निर्यात की खेप बंदरगाहों पर अटक गई है। इसका परिणाम यह हुआ कि करोड़ों रुपये का माल फंसा हुआ है और बाजार में नकदी का प्रवाह लगभग रुक गया है।

 

राजस्थान ग्वार उत्पादन में देश ही नहीं, बल्कि दुनिया में भी अग्रणी माना जाता है, और जोधपुर इसका प्रमुख प्रोसेसिंग हब है। ग्वार से बनने वाला ग्वार गम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल और गैस उद्योग, खासकर शेल गैस ड्रिलिंग में उपयोग होता है। लेकिन वर्तमान वैश्विक तनाव के चलते तेल उत्पादन और ड्रिलिंग गतिविधियों में कमी आई है, जिससे इसकी मांग में भारी गिरावट आई है। व्यापारियों के अनुसार, ग्वार गम की कीमतों में प्रति क्विंटल करीब 2000 रुपये तक की कमी दर्ज की गई है।

 

इसी तरह मसाला फसलों पर भी संकट गहराया हुआ है। नागौर की मंडियों में जीरा, मैथी और इसबगोल जैसे उत्पादों की कीमतें तेजी से गिरी हैं। निर्यात ठप होने के कारण बाजार में आपूर्ति अधिक है, जबकि मांग लगभग खत्म हो गई है। इससे जीरे के दाम 15 से 20 रुपये प्रति किलो तक गिर गए हैं, जबकि इसबगोल की कीमतों में भी 10 से 15 रुपये प्रति किलो की कमी आई है।

 

इस स्थिति ने किसानों और व्यापारियों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। किसानों ने बेहतर दाम की उम्मीद में अपनी फसलें रोक रखी थीं, लेकिन अब उन्हें नुकसान में बेचने की नौबत आ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात पर अत्यधिक निर्भरता जोखिम भरी हो सकती है, इसलिए किसानों को घरेलू बाजार की मांग के अनुसार फसल विविधीकरण पर ध्यान देना चाहिए।

 

यदि जल्द ही वैश्विक हालात सामान्य नहीं हुए, तो यह संकट और गहरा सकता है, जिससे राजस्थान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है।

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