नागौर मेडिकल कॉलेज निर्माण रुका, छात्रों की पढ़ाई पर संकट

Edited By Anil Jangid, Updated: 30 Mar, 2026 04:53 PM

construction halt at nagaur medical college disrupts students education

नागौर: राजस्थान के नागौर में करोड़ों की लागत से बनने वाला सरकारी मेडिकल कॉलेज फिर से निर्माण बाधाओं का शिकार हो गया है। ठेकेदार द्वारा निर्माण कार्य रोक देने से एकेडमिक ब्लॉक, हॉस्टल और प्रयोगशालाओं का निर्माण अधूरा रह गया है, जिसका सीधा असर कॉलेज...

नागौर: राजस्थान के नागौर में करोड़ों की लागत से बनने वाला सरकारी मेडिकल कॉलेज फिर से निर्माण बाधाओं का शिकार हो गया है। ठेकेदार द्वारा निर्माण कार्य रोक देने से एकेडमिक ब्लॉक, हॉस्टल और प्रयोगशालाओं का निर्माण अधूरा रह गया है, जिसका सीधा असर कॉलेज के छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। यहां दो बैचों का प्रवेश हो चुका है, लेकिन बुनियादी सुविधाएं अब तक पूरी नहीं हुई हैं।

 

करीब 325 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास 9 मार्च 2022 को किया गया था। निर्माण को 18 माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब 48 महीने बीत जाने के बावजूद काम अधूरा है। कॉलेज प्राचार्य ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर समस्या से अवगत कराया है, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

 

नागौर मेडिकल कॉलेज को दिसंबर 2019 में स्वीकृति मिली थी। इसके तहत निर्माण की लागत का 60 प्रतिशत केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार द्वारा वहन की जानी थी। स्वीकृति मिलने के लगभग ढाई वर्ष बाद मई 2022 में निर्माण शुरू हुआ, लेकिन अब तक परियोजना पूरी नहीं हो पाई है।

 

निर्माण में देरी के साथ-साथ स्थायी शिक्षकों की कमी भी समस्या बढ़ा रही है। राजस्थान मेडिकल एजुकेशन सोसायटी (राजमैस) ने अब तक पर्याप्त असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्त नहीं किए हैं, जिससे शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है। विशेषकर एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के छात्रों को इसका प्रत्यक्ष नुकसान हो रहा है, जिन्हें न तो पूरी सैद्धांतिक पढ़ाई मिल पा रही है और न ही आवश्यक व्यावहारिक प्रशिक्षण।

 

कॉलेज को 100 एमबीबीएस सीटों के लिए संबद्धता मिल चुकी है। प्रथम और द्वितीय वर्ष की कक्षाएं संचालित हो रही हैं, लेकिन अधूरी लैब और संसाधनों के अभाव में छात्रों को पहले वर्ष की प्रयोगशालाओं में ही प्रैक्टिकल करना पड़ रहा है। द्वितीय वर्ष के छात्रों को पैथोलॉजी, फार्माकोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों की पढ़ाई में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

 

छात्रों में असंतोष बढ़ रहा है, हालांकि वे खुले तौर पर सामने नहीं आ रहे हैं। उनका कहना है कि अधूरी सुविधाओं के बीच पढ़ाई करना उनके भविष्य के साथ समझौता करने जैसा है। अगर समय रहते निर्माण और शिक्षण व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया, तो आगामी शैक्षणिक सत्र भी प्रभावित हो सकता है।

 

निर्माण एजेंसी के अधिकारियों का कहना है कि ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। अधूरा मेडिकल कॉलेज न केवल छात्रों के भविष्य पर असर डाल रहा है, बल्कि जिले में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की उम्मीदों को भी प्रभावित कर रहा है।

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