नागौर: बिजली विभाग में सामग्री में करोड़ों का घपला! ठेकेदार ने लगाया 3 करोड़ से अधिक का चूना

Edited By Anil Jangid, Updated: 19 Mar, 2026 05:20 PM

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नागौर: नागौर जिले के बिजली विभाग में एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसमें ठेकेदार द्वारा विभाग की सामग्री का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपए की वित्तीय हानि पहुंचाई गई है। यह मामला करीब छह साल पुराना है, जब कूनो नेशनल पार्क के कार्यों में दो बड़े ठेकों में...

नागौर: नागौर जिले के बिजली विभाग में एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसमें ठेकेदार द्वारा विभाग की सामग्री का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपए की वित्तीय हानि पहुंचाई गई है। यह मामला करीब छह साल पुराना है, जब कूनो नेशनल पार्क के कार्यों में दो बड़े ठेकों में अनियमितताओं की शिकायत मिली थी। जांच में यह सामने आया कि ठेकेदार फर्म "मैसर्स श्रीराम इलेक्ट्रिकल एंड कंस्ट्रक्शन" ने निगम की सामग्री का जमकर दुरुपयोग किया, जिससे विभाग को 3.17 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

 

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, शिकायत के बाद विभागीय जांच में यह पाया गया कि कार्य आदेश संख्या 7424 और 7426 (7 जनवरी 2020) के तहत ठेकेदार ने कुल 3,17,34,859 रुपए की सामग्री का गलत उपयोग किया। कार्य आदेश 7424 में 98,41,533 रुपए और कार्य आदेश 7426 में 2,18,93,326 रुपए का दुरुपयोग हुआ। इस मामले ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, खासकर तब जब छोटे उपभोक्ताओं के कनेक्शन काटे जा रहे हैं, जबकि बड़े ठेकेदारों द्वारा करोड़ों की ठगी की जा रही है।

 

जांच रिपोर्ट आने के बाद, एवीवीएनएल की सचिव सीमा शर्मा ने नागौर अधीक्षण अभियंता को ठेकेदार को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। इसके बाद ठेकेदार को सात दिनों के भीतर जवाब देने को कहा गया, और अब आगे की कार्रवाई अजमेर डिस्कॉम द्वारा की जाएगी।

 

इस बड़े स्तर पर अनियमितताएं सामने आने से यह सवाल उठता है कि क्या अधिकारियों की मिलीभगत थी, जो इस गड़बड़ी को इतने लंबे समय तक छिपाए रखा गया? इस मामले में यह भी देखने योग्य है कि क्या अन्य कार्य आदेशों में भी इसी तरह की अनियमितताएं हुई हैं।

 

इस घोटाले से पहले भी "मैसर्स श्रीराम इलेक्ट्रिकल एंड कंस्ट्रक्शन" के खिलाफ अनियमितताएं सामने आ चुकी हैं। 2020 में एक अन्य मामले में भी गड़बड़ी साबित होने पर 24.83 लाख की पेनल्टी वसूल की गई थी। हालांकि, सांसद हनुमान बेनीवाल ने दो बार एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे, लेकिन अधिकारियों ने इसे नजरअंदाज कर दिया।

 

अब इस घोटाले में आगे की कार्रवाई की जा रही है, और यह देखने की बात होगी कि क्या जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाती है या केवल ठेकेदार पर ही जिम्मेदारी डाली जाएगी।

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