Edited By Sourabh Dubey, Updated: 05 Oct, 2026 01:59 PM
अनुसूचित क्षेत्र में ग्राम पंचायतों को अधिक स्वायत्त और सशक्त बनाने की मांग को लेकर ट्रायबल ऑटोनोमस काउंसिल संभाग डूंगरपुर ने 33 सूत्री मांगों का ज्ञापन राज्यपाल, पंचायतीराज विभाग और जनजातीय क्षेत्रीय विकास विभाग के अधिकारियों को भेजा है। काउंसिल ने...
डूंगरपुर। अनुसूचित क्षेत्र में ग्राम पंचायतों को अधिक स्वायत्त और सशक्त बनाने की मांग को लेकर ट्रायबल ऑटोनोमस काउंसिल संभाग डूंगरपुर ने 33 सूत्री मांगों का ज्ञापन राज्यपाल, पंचायतीराज विभाग और जनजातीय क्षेत्रीय विकास विभाग के अधिकारियों को भेजा है। काउंसिल ने पांचवीं अनुसूची, संविधान के अनुच्छेद 244(1), 13 और 243 तथा पेसा कानून के प्रावधानों को अनुसूचित क्षेत्रों में प्रभावी रूप से लागू करने की मांग की है।
ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर और स्वशासित बनाने पर जोर
काउंसिल के संस्थापक प्रवेश भगोरा ने बताया कि 33 सूत्री मांगों का मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायतों को स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भर, स्वावलंबी और स्वशासित इकाई के रूप में विकसित करना है। ज्ञापन में महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज और डॉ. जयपाल सिंह मुंडा के आदिवासी स्वशासन, जल-जंगल-जमीन और आदिवासी अस्मिता से जुड़े विचारों का उल्लेख किया गया है।
काउंसिल ने अनुसूचित क्षेत्रों में पारंपरिक ग्राम सभाओं और स्थानीय स्वशासन की व्यवस्था को मजबूत करने तथा ग्रामीणों की निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ाने की मांग की है।
हर ग्राम पंचायत में एम्बुलेंस और अन्य सुविधाओं की मांग
ज्ञापन में प्रत्येक ग्राम पंचायत में एम्बुलेंस, पुस्तकालय, गौशाला के लिए भूमि, स्ट्रीट लाइट, संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी, व्यायामशाला और खेल मैदान जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
इसके साथ ही गरीब विद्यार्थियों को स्कूल ड्रेस, पेन, कॉपी और किताबें उपलब्ध कराने तथा जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए निशुल्क कोचिंग की व्यवस्था करने का सुझाव दिया गया है।
फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्रों के लिए RO प्लांट की मांग
काउंसिल ने फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्रों में बड़े आरओ प्लांट स्थापित करने की मांग की है। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना में वास्तविक जरूरत के आधार पर आवास स्वीकृत करने, श्मशान घाट तक सड़क और बैठक स्थल उपलब्ध कराने तथा सार्वजनिक स्थानों पर सार्वजनिक शौचालय बनाने की मांग रखी गई है।
ज्ञापन में प्रत्येक महीने ग्राम सभा या आम सभा आयोजित कर ग्रामीणों की समस्याओं को स्थानीय स्तर पर सुनने और उनके समाधान की व्यवस्था करने पर भी जोर दिया गया है।
किसानों के लिए सिंचाई और सुरक्षा व्यवस्था की मांग
काउंसिल ने किसानों की समस्याओं को भी 33 सूत्री मांगों में प्रमुखता से शामिल किया है। जंगली जानवरों से फसलों को बचाने के लिए तारबंदी सुविधा, सूखे कुओं का गहरीकरण, तालाबों का सुदृढ़ीकरण और बेहतर सिंचाई व्यवस्था विकसित करने की मांग की गई है।
इसके साथ ही ग्राम पंचायत स्तर पर कृषि मंडी, पशुपालन को बढ़ावा, औषधीय पौधों की खेती, लघु उद्योग और स्थानीय रोजगार के अवसर विकसित करने की मांग की गई है।
ग्राम पंचायत स्तर पर तकनीकी प्रशिक्षण केंद्र खोलने की मांग
काउंसिल ने युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के लिए तैयार करने के उद्देश्य से विभिन्न तकनीकी प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने का सुझाव दिया है। इनमें सिलाई, सुथार, वेल्डिंग, मोटरसाइकिल और ट्रैक्टर मरम्मत, मोबाइल रिपेयरिंग तथा वस्त्र चित्रकला जैसे प्रशिक्षण शामिल हैं।
इसके अलावा बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देने की मांग की गई है।
सौर ऊर्जा और बेहतर सड़क व्यवस्था पर भी जोर
ज्ञापन में किसानों और ग्रामीणों को बिजली की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की मांग की गई है। वहीं, गांवों में सड़कों की नियमित सफाई और आवश्यकता के अनुसार सीसी सड़क निर्माण कराने की मांग भी रखी गई है।
अपने स्तर पर तैयार करेंगे प्रस्ताव और परियोजनाएं
प्रवेश भगोरा ने कहा कि काउंसिल इन मांगों से जुड़े प्रस्ताव, एजेंडा और परियोजनाएं अपने स्तर पर तैयार कर संबंधित विभागों के समक्ष प्रस्तुत करेगी। उन्होंने कहा कि ग्राम स्वराज की अवधारणा को मजबूत करने के लिए ग्रामीणों को स्थानीय निर्णय प्रक्रिया में अधिक भागीदारी मिलना जरूरी है।
काउंसिल का कहना है कि यदि ग्राम पंचायतों को पर्याप्त अधिकार और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तो अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर विकास, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं को और मजबूत किया जा सकता है।