डूंगरपुर में अवैध निर्माण पर नगर परिषद सख्त, अब सीज हो सकती है संपत्ति; कॉलोनाइजरों पर कार्रवाई की तैयारी

Edited By Sourabh Dubey, Updated: 26 Oct, 2026 04:38 PM

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राजस्थान के डूंगरपुर शहर में अवैध निर्माण और जमीन के नियम विरुद्ध इस्तेमाल को लेकर नगर परिषद ने सख्त रुख अपनाया है। सभापति सुशीला गुप्ता ने निजी कॉलोनियों में मूलभूत सुविधाएं विकसित नहीं करने वाले कॉलोनाइजरों, आवासीय भूखंडों पर बिना अनुमति...

डूंगरपुर। राजस्थान के डूंगरपुर शहर में अवैध निर्माण और जमीन के नियम विरुद्ध इस्तेमाल को लेकर नगर परिषद ने सख्त रुख अपनाया है। सभापति सुशीला गुप्ता ने निजी कॉलोनियों में मूलभूत सुविधाएं विकसित नहीं करने वाले कॉलोनाइजरों, आवासीय भूखंडों पर बिना अनुमति व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वालों और कृषि भूमि पर भू-उपयोग परिवर्तन के बिना निर्माण करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। नियमों की अनदेखी करने वाले मामलों में संपत्ति सीज करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

नगर परिषद की ओर से निजी कॉलोनियों का सर्वे और आम सूचना जारी करने की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। अब संबंधित मामलों में कार्रवाई की तैयारी है। परिषद ने स्पष्ट किया है कि जमीन के उपयोग और कॉलोनियों के विकास से जुड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।

प्लॉट बेचकर सुविधाएं नहीं देने वाले कॉलोनाइजरों पर कार्रवाई

डूंगरपुर शहर में निजी कॉलोनियां विकसित करने के बाद भूखंड बेचकर विकास कार्य अधूरे छोड़ने वाले कॉलोनाइजर नगर परिषद के निशाने पर हैं। कई कॉलोनियों में सड़क, नाली, पेयजल, बिजली और पार्क जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी से भूखंड खरीदने वाले परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

सभापति सुशीला गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि कॉलोनाइजर केवल भूखंड बेचकर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकते। स्वीकृत योजना के अनुसार जरूरी विकास कार्य कराना उनकी जिम्मेदारी है। यदि निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया जाता है, तो संबंधित विकासकर्ताओं के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। गंभीर मामलों में उनकी संपत्ति सीज करने की कार्रवाई भी प्रस्तावित है।

पट्टा, नामांतरण और भवन निर्माण स्वीकृति पर रोक

नगर परिषद ने संबंधित निजी कॉलोनियों में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति स्पष्ट होने तक पट्टा जारी करने, नामांतरण, उपविभाजन और भवन निर्माण स्वीकृति जैसे कार्यों पर रोक लगाने का निर्णय लिया है।

इस कदम का उद्देश्य कॉलोनाइजरों की जवाबदेही तय करना और भूखंड खरीदने वाले लोगों को स्वीकृत योजना के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध कराना है। परिषद का मानना है कि कॉलोनी में सड़क, नाली, पेयजल, बिजली और पार्क जैसी सुविधाएं विकसित करना जरूरी है। सुविधाएं अधूरी छोड़ने पर विकासकर्ताओं को जवाबदेह बनाया जाएगा।

आवासीय भूखंड पर दुकान या कारोबार चलाने वालों को चेतावनी

नगर परिषद ने आवासीय भूखंडों पर बिना आवश्यक अनुमति व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई का रुख अपनाया है। शहर में ऐसे मामलों की पहचान कर नियमानुसार कदम उठाए जाएंगे।

सभापति सुशीला गुप्ता के अनुसार, आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित भूखंड का व्यावसायिक इस्तेमाल संबंधित नियमों और जरूरी अनुमतियों के अनुरूप ही किया जा सकता है। बिना अनुमति दुकान, प्रतिष्ठान या अन्य व्यावसायिक गतिविधियां चलाने के मामलों में भूखंड के उपयोग और स्वीकृतियों की जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।

कृषि भूमि पर बिना भू-उपयोग परिवर्तन निर्माण करने वालों पर शिकंजा

कृषि भूमि पर बिना निर्धारित भू-उपयोग परिवर्तन के मकान, दुकान या व्यावसायिक प्रतिष्ठान बनाने वालों पर भी नगर परिषद की नजर है। परिषद ने स्पष्ट किया है कि जमीन का उपयोग बदलने से पहले संबंधित नियमों के तहत जरूरी प्रक्रिया और अनुमतियां पूरी करना आवश्यक है।

यदि जांच में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित मामले में नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। परिस्थितियों और लागू प्रावधानों के अनुसार संपत्ति सीज करने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।

नगर परिषद का संदेश: नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं

डूंगरपुर नगर परिषद की इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य निजी कॉलोनियों में विकास कार्य सुनिश्चित करना, भूखंड खरीदने वालों के हितों की रक्षा करना और शहर में भूमि उपयोग से जुड़े नियमों का पालन कराना है।

सभापति सुशीला गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि सर्वे और आम सूचना के बाद अब संबंधित मामलों में कार्रवाई की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले कॉलोनाइजरों और अवैध रूप से भूमि का उपयोग करने वालों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कदम उठाए जाएंगे। अब देखना होगा कि नगर परिषद की इस कार्रवाई से शहर में अवैध निर्माण और अधूरी सुविधाओं वाली कॉलोनियों की समस्या पर कितना अंकुश लग पाता है।

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