Edited By Liza Chandel, Updated: 26 Feb, 2025 04:55 PM
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सुप्रीम कोर्ट ने अवैध बजरी खनन को लेकर दायर अवमानना याचिका को खारिज करते हुए राजस्थान के मुख्य सचिव को राहत दी है। यह याचिका नवीन शर्मा द्वारा दायर की गई थी, जिसमें राजस्थान सरकार पर 16 नवंबर 2017 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने का आरोप...
सुप्रीम कोर्ट ने अवैध बजरी खनन पर दायर अवमानना याचिका की खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने अवैध बजरी खनन को लेकर दायर अवमानना याचिका को खारिज करते हुए राजस्थान के मुख्य सचिव को राहत दी है। यह याचिका नवीन शर्मा द्वारा दायर की गई थी, जिसमें राजस्थान सरकार पर 16 नवंबर 2017 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया था।
याचिकाकर्ता ठोस सबूत पेश करने में रहा असमर्थ
याचिका में दावा किया गया था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद राज्य सरकार अवैध बजरी खनन रोकने में विफल रही है और प्रदेश में यह बड़े पैमाने पर जारी है। हालांकि, सुनवाई के दौरान जब सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि जिन 82 खदान मालिकों को खनन कार्य बंद करने का आदेश दिया गया था, क्या उनमें से कोई अब भी अवैध खनन कर रहा है, तो उसके ठोस प्रमाण पेश किए जाएं। याचिकाकर्ता कोई स्पष्ट साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका, जिसके चलते कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।
राजस्थान सरकार ने किया अवैध खनन से इनकार
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवमंगल शर्मा ने पक्ष रखा और कहा कि राज्य में कोई अवैध बजरी खनन नहीं हो रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पूरी तरह पालन कर रही है और प्रदेश में खनन नियमों को सख्ती से लागू किया गया है।
2017 में सुप्रीम कोर्ट ने लगाया था प्रतिबंध
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में राजस्थान में बजरी खनन पर प्रतिबंध लगा दिया था। अदालत ने आदेश में कहा था कि अंधाधुंध बजरी खनन पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है और यह पुनर्भरण अध्ययन (Replenishment Study) के बिना किया जा रहा था, जो कि नियमों के खिलाफ है।