टोंक की सरपंच नीता कंवर को हाईकोर्ट से मिली राहत, फिर भी पद ग्रहण नहीं

Edited By Anil Jangid, Updated: 01 Mar, 2026 06:01 PM

tonk sarpanch neeta kanwar gets high court relief yet not reinstated

टोंक। राजस्थान के टोंक जिले की ग्राम पंचायत नटवाड़ा की सरपंच नीता कंवर को राजस्थान हाई कोर्ट से राहत मिलने के बावजूद जिला कलेक्टर और जिला परिषद के सीईओ द्वारा पुनः पद ग्रहण नहीं कराया गया है। नीता कंवर को पंचायत राज विभाग ने भ्रष्टाचार के आरोप में...

टोंक। राजस्थान के टोंक जिले की ग्राम पंचायत नटवाड़ा की सरपंच नीता कंवर को राजस्थान हाई कोर्ट से राहत मिलने के बावजूद जिला कलेक्टर और जिला परिषद के सीईओ द्वारा पुनः पद ग्रहण नहीं कराया गया है। नीता कंवर को पंचायत राज विभाग ने भ्रष्टाचार के आरोप में प्रशासक के पद से मुक्त किया था, लेकिन हाई कोर्ट ने उन्हें न्याय दिलाते हुए स्टे ऑर्डर जारी किया।

 

नीता कंवर आज हाई कोर्ट के वकील बलराम जाखड़ के साथ टोंक पहुंची और जिला कलेक्टर की अनुपस्थिति में कलेक्टर कार्यालय एवं जिला परिषद कार्यालय में हाई कोर्ट के स्टे ऑर्डर की कॉपी सौंपते हुए प्रशासक पद पुनः सौंपे जाने की मांग की। स्टे ऑर्डर की कॉपी पहले ही तीन दिन पूर्व ईमेल के माध्यम से कलेक्टर और सीईओ को भेजी जा चुकी थी, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर नीता कंवर को व्यक्तिगत रूप से यह कदम उठाना पड़ा।

 

जिला परिषद के सीईओ ने उन्हें मंत्री से मिलने के लिए कहा, जिसे वकील बलराम जाखड़ ने उच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना बताया। नीता कंवर का कहना है कि उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश की जा रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे न भ्रष्टाचारी हैं और न ही कमज़ोर, और आवश्यक होने पर वे न्यायालय की कार्रवाई को सर्वोच्च न्यायालय तक ले जाने को तैयार हैं।

 

नीता कंवर पाकिस्तान मूल की हैं और 2001 में सिंध से राजस्थान आईं। 2011 में टोंक जिले की ग्राम पंचायत निवासी लक्ष्मण करण राठौड़ के पुत्र से विवाह किया। 2011-2019 तक नागरिकता प्राप्त करने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और सीएए के तहत भारत की नागरिकता हासिल की। 2020 में उन्होंने सरपंच का चुनाव लड़ा और विजयी रहीं। वे भारत की एकमात्र ऐसी सरपंच हैं जो पाकिस्तान मूल की थीं।

 

नीता कंवर को पंचायत क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण और नवाचार के क्षेत्र में किए गए कार्यों के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। उनका मानना है कि प्रशासन और पंचायत राज विभाग की कार्यशैली में राजनीतिक दखल है, और आरोप बिना सुनवाई और पत्राचार के लगाए गए।

 

हाई कोर्ट से मिली राहत के बावजूद पद ग्रहण न कराना प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है और स्थानीय स्तर पर राजनीतिक विवाद को उजागर करता है।

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!