कोटा थर्मल पावर प्लांट में भालू ने किया कर्मचारी पर हमला, सुरक्षा व्यवस्थाओं पर उठे सवाल

Edited By Anil Jangid, Updated: 20 Apr, 2026 07:05 PM

bear attacks employee at kota thermal power plant

कोटा। कोटा थर्मल पावर प्लांट में रविवार शाम को एक कर्मचारी पर भालू द्वारा किए गए हमले की घटना ने सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, प्लांट में कार्यरत कर्मचारी नितिन मिश्रा अपनी ड्यूटी के दौरान कैंटीन से लौट...

कोटा। कोटा थर्मल पावर प्लांट में रविवार शाम को एक कर्मचारी पर भालू द्वारा किए गए हमले की घटना ने सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, प्लांट में कार्यरत कर्मचारी नितिन मिश्रा अपनी ड्यूटी के दौरान कैंटीन से लौट रहे थे। इसी दौरान झाड़ियों में छिपे एक भालू ने अचानक पीछे से उन पर हमला कर दिया। हमला इतना अचानक था कि नितिन मिश्रा को संभलने का कोई मौका नहीं मिला, जिससे उनके कपड़े फट गए और सीने पर खरोंचें आईं।

 

हमले की घटना के बाद नितिन मिश्रा की चीख सुनकर आसपास काम कर रहे अन्य कर्मचारी मौके पर पहुंचे और शोर मचाते हुए भालू को वहां से भगाया। तत्पश्चात, घायल कर्मचारी को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका प्राथमिक उपचार किया गया। राहत की बात यह रही कि नितिन मिश्रा को कोई गंभीर चोट नहीं आई। हालांकि, इस घटना ने प्लांट परिसर में काम करने वाले कर्मचारियों के बीच डर का माहौल बना दिया है।

 

वन विभाग और सुरक्षा पर उठे सवाल
भारतीय मजदूर संघ की थर्मल इकाई के अध्यक्ष वीरेंद्र कश्यप ने इस घटना पर वन विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि थर्मल प्लांट के परिसर में वन्यजीवों की आवाजाही लंबे समय से हो रही है और कई बार इस बारे में संबंधित अधिकारियों को सूचित किया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

 

जंगली जानवरों की मौजूदगी पहले भी थी
कर्मचारियों का कहना है कि चंबल नदी के पास स्थित इस इलाके में भालू और अन्य जंगली जानवरों की मौजूदगी पहले भी देखी जा चुकी है। हाल ही में वन विभाग द्वारा कर्मचारियों को वन्यजीवों से संबंधित जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किया गया था, लेकिन कर्मचारियों का मानना है कि केवल जागरूकता से काम नहीं चलेगा, जब तक सुरक्षा के ठोस इंतजाम नहीं किए जाते।

 

वन चौकी की स्थापना की मांग
घटना के बाद कर्मचारियों ने मांग की है कि प्लांट परिसर में घूम रहे वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से पकड़कर जंगल में छोड़ा जाए और संवेदनशील क्षेत्रों में वन विभाग की स्थायी चौकी स्थापित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।

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