Edited By Anil Jangid, Updated: 05 Jan, 2026 12:41 PM

जयपुर। राजस्थान के परिवहन विभाग में बहुचर्चित ‘थ्री-डिजिट VIP नंबर घोटाले’ में अब कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई है। जयपुर के गांधीनगर थाने में आरटीओ प्रथम राजेंद्र सिंह शेखावत की शिकायत पर 39 अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इस...
जयपुर। राजस्थान के परिवहन विभाग में बहुचर्चित ‘थ्री-डिजिट VIP नंबर घोटाले’ में अब कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई है। जयपुर के गांधीनगर थाने में आरटीओ प्रथम राजेंद्र सिंह शेखावत की शिकायत पर 39 अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इस घोटाले में सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ कर वीआईपी और मनपसंद नंबर अवैध तरीके से आवंटित किए गए, जिससे सरकार को करीब 500 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हुआ।
आरोप है कि अधिकारियों और कर्मचारियों ने आपसी मिलीभगत से फर्जी दस्तावेज तैयार किए और नियमों को ताक पर रखकर 2129 गाड़ियों को थ्री-डिजिट फैंसी नंबर दे दिए। यह प्रक्रिया ऑनलाइन ऑक्शन और तय शुल्क व्यवस्था को दरकिनार कर की गई। इससे सरकारी खजाने को भारी चपत लगी।
एफआईआर में संयुक्त आयुक्त धर्मपाल आसीवाल, आरटीओ इंदु मीणा, एआरटीओ प्रकाश टहलियानी, डीटीओ संजय शर्मा, सुनील सेनी, संजीव भारद्वाज, संस्थापन अधिकारी राज सिंह चौधरी, लिपिक अयूब खान, जहांगीर खान, सुरेश तनेजा, कपिल भाटिया सहित 12 से अधिक अन्य कार्मिकों के नाम शामिल हैं।
गांधीनगर थाना प्रभारी भजनलाल ने बताया कि मामले में सरकारी रिकॉर्ड में अवैध हेरफेर, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और पद के दुरुपयोग जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और संभावना जताई जा रही है कि अन्य जिलों में भी इसी तरह की एफआईआर दर्ज हो सकती हैं।
यह घोटाला राजस्थान के ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट का अब तक का सबसे बड़ा और चर्चित मामला माना जा रहा है। सरकार के सख्त रुख के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और आने वाले दिनों में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना है।