जयपुर में ‘रास्ता खोलो अभियान’ बना मिसाल: 17 महीनों में 1800 से ज्यादा रास्ते खुले, लाखों ग्रामीणों को राहत

Edited By LUCKY SHARMA, Updated: 29 Mar, 2026 07:52 PM

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जयपुर जिले में चल रहा ‘रास्ता खोलो अभियान’ अब एक मिसाल बनकर उभरा है। इस अभियान ने न केवल वर्षों पुराने विवादों को सुलझाया, बल्कि लाखों ग्रामीणों की जिंदगी को आसान बना दिया।

प्रशासनिक पहल से बदली ग्रामीणों की जिंदगी

जयपुर जिले में चल रहा ‘रास्ता खोलो अभियान’ अब एक मिसाल बनकर उभरा है। इस अभियान ने न केवल वर्षों पुराने विवादों को सुलझाया, बल्कि लाखों ग्रामीणों की जिंदगी को आसान बना दिया।

इसका सबसे बड़ा उदाहरण लसाड़िया पंचायत में देखने को मिला, जहां वर्षों से बंद रास्ता खुलने के बाद ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली।

30 साल बाद खुला रास्ता, दूरी आधी हुई

लसाड़िया पंचायत में गडूड़ा से चकवाड़ा तक जाने वाला रास्ता करीब 30 वर्षों से बंद पड़ा था। इस कारण ग्रामीणों को 17 किलोमीटर का लंबा सफर तय करना पड़ता था।

अभियान के तहत रास्ता खुलने के बाद यह दूरी घटकर महज 7 किलोमीटर रह गई है। साथ ही ग्रेवल सड़क बनने से आवाजाही और भी आसान हो गई है।

खेती, शिक्षा और स्वास्थ्य में बड़ा फायदा

रास्ता खुलने के बाद ग्रामीणों के जीवन में कई सकारात्मक बदलाव आए हैं:

  • किसान अपनी उपज आसानी से बाजार तक पहुंचा पा रहे हैं
  • बच्चों को स्कूल जाने में सुविधा मिली है
  • जरूरत के समय चिकित्सा सेवाएं जल्दी मिल रही हैं

17 महीनों में 1800 से ज्यादा रास्ते खुले

जिला प्रशासन के अनुसार 15 नवंबर 2024 से 29 मार्च 2026 तक इस अभियान के तहत 1,802 रास्ते खोले जा चुके हैं

जिला कलेक्टर डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी के निर्देशन में यह अभियान निरंतर चल रहा है और हर सप्ताह कम से कम 3 रास्ते खोलने का लक्ष्य रखा गया है।

फागी तहसील रही सबसे आगे

अतिरिक्त जिला कलेक्टर आशीष कुमार ने बताया कि फागी तहसील ने सबसे ज्यादा 154 रास्ते खोलकर प्रथम स्थान हासिल किया।

इसके अलावा:

  • मौजमाबाद: 135
  • चौमूं: 109
  • शाहपुरा: 106
  • चाकसू: 100
  • फुलेरा: 99
  • आमेर: 94
  • बस्सी: 85
  • सांगानेर: 39
  • जयपुर तहसील: 5 रास्ते

संवाद से सुलझे वर्षों पुराने विवाद

इस अभियान की खास बात यह रही कि प्रशासन ने सख्ती के बजाय संवाद, सहमति और समझाइश के जरिए वर्षों पुराने विवादों को सुलझाया।

गांवों, ढाणियों और खेतों तक जाने वाले रास्तों को फिर से शुरू कर ग्रामीणों को राहत पहुंचाई गई।

ग्रामीण विकास की दिशा में बड़ा कदम

‘रास्ता खोलो अभियान’ को केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि संवेदनशील शासन का उदाहरण माना जा रहा है।

इससे ग्रामीण विकास, कनेक्टिविटी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।

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