Edited By Shruti Jha, Updated: 23 Jul, 2025 05:41 PM

राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने बुधवार को शिक्षा विभाग के अधिकारियों और प्रधानाचार्यों के साथ एक अनूठी संवाद पहल की शुरुआत की। प्रताप नगर स्थित माहेश्वरी पब्लिक स्कूल के रुद्राक्ष सभागार में जयपुर जिले के अधीनस्थ कार्यालयों और विद्यालयों के...
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने किया शिक्षा अधिकारियों के साथ संवाद: राजस्थान को शिक्षा में अग्रणी बनाने का आह्वान
जयपुर, 23 जुलाई 2025 – राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने बुधवार को शिक्षा विभाग के अधिकारियों और प्रधानाचार्यों के साथ एक अनूठी संवाद पहल की शुरुआत की। प्रताप नगर स्थित माहेश्वरी पब्लिक स्कूल के रुद्राक्ष सभागार में जयपुर जिले के अधीनस्थ कार्यालयों और विद्यालयों के शिक्षा अधिकारियों के साथ आयोजित इस कार्यक्रम में पहली बार ऐसी सकारात्मक चर्चा देखने को मिली।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और संस्कार निर्माण पर जोर
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने संवाद के दौरान कहा कि राजस्थान को शिक्षा के क्षेत्र में भारत में सर्वोपरि बनाने का बड़ा जिम्मा इन अधिकारियों पर है। उन्होंने सभी से बड़ा लक्ष्य निर्धारित करने और छोटे-मोटे व्यवधानों से न घबराने का आग्रह किया। दिलावर ने विद्यार्थियों को संस्कारित बनाने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने पर विशेष ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया। उन्होंने शिक्षकों से विवेकानंद और शिवाजी जैसे महान व्यक्तित्वों को तैयार करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
'हरियालो राजस्थान' अभियान और नवाचारों पर चर्चा
दिलावर ने 'हरियालो राजस्थान' अभियान की चर्चा करते हुए पेड़ों के महत्व और वर्तमान समय में उनकी महती आवश्यकता पर भी शिक्षकों से संवाद किया। उन्होंने पीएमश्री विद्यालयों में किए जा रहे नवाचारों, कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों, आईसीटी लैब, स्मार्ट क्लास और विवेकानंद मॉडल स्कूलों सहित अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी प्रकाश डाला।
इस दौरान कई प्राचार्यों ने शिक्षा मंत्री से संवाद करते हुए अपने नवाचारों से अवगत कराया। किसी ने वीडियो के ज़रिए रोचक अंदाज़ में शिक्षा देने की बात कही, तो किसी ने नव नियुक्त शिक्षकों के लिए विशेष कार्यशाला आयोजित कर उनका संबलन करने के नवाचार की जानकारी प्रदान की।
पदोन्नति और गैर-शैक्षणिक कार्यों पर स्पष्टीकरण
शिक्षामंत्री ने बताया कि उनकी सरकार ने शुरुआती डेढ़ वर्ष में 33 हज़ार पदोन्नतियां की हैं, और शेष रह गई पदोन्नतियां भी शीघ्र पूरी कर दी जाएंगी। शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने की चर्चा के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल आवश्यक कार्यों में ही शिक्षकों को लगाया जाता है, क्योंकि राजकीय कर्मचारियों में शिक्षकों की संख्या सर्वाधिक है। हाल ही में भेड़ गिनने में शिक्षकों को लगाए जाने के मामले पर उन्होंने कहा कि इस मामले के सामने आने के बाद तुरंत जिला कलेक्टर को आदेश निरस्त करने के निर्देश दे दिए गए थे।
शिक्षकों की भूमिका पर आध्यात्मिक दृष्टिकोण
हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा मेला के सचिव सोमकांत ने भी इस अवसर पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि शिक्षित व्यक्ति वह नहीं होता जो केवल अक्षर ज्ञान प्राप्त करता है, बल्कि वह होता है जो प्रकृति व मानव समाज के प्रति दया का भाव रखते हुए, कर्तव्य का निर्वाह करते हुए आगे बढ़ता है। सोमकांत ने सरकारी विद्यालयों में अध्यापकों और विद्यार्थियों की गुणवत्ता को निजी विद्यालयों से बेहतर बताया। उन्होंने स्वामी विवेकानंद और चाणक्य के उदाहरण देते हुए शिक्षकों के महत्व और उनकी भूमिका पर जोर दिया।
कार्यक्रम में विशेषाधिकारी सतीश गुप्ता और संयुक्त निदेशक मंजू शर्मा सहित जयपुर जिले के अधीनस्थ कार्यालयों और विद्यालयों के कई शिक्षा अधिकारियों तथा प्राचार्यों ने भाग लिया।