चूरू आरजीएचएस घोटाला: आरोपियों के साथ जांच में पुलिस भी कटघरे में, कोर्ट ने पकड़ी बड़ी गड़बड़ी

Edited By Anil Jangid, Updated: 07 Jan, 2026 04:16 PM

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चूरू। राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में चूरू जिले में सामने आए लाखों रुपये के घोटाले ने अब नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। इस मामले में न सिर्फ आरोपी कटघरे में आए हैं, बल्कि जांच करने वाली पुलिस की भूमिका पर भी...

चूरू। राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में चूरू जिले में सामने आए लाखों रुपये के घोटाले ने अब नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। इस मामले में न सिर्फ आरोपी कटघरे में आए हैं, बल्कि जांच करने वाली पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। चूरू के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) कोर्ट ने कोतवाली थाना पुलिस द्वारा पेश की गई जांच रिपोर्ट को संदिग्ध और दूषित मानते हुए कड़ा रुख अपनाया है।

 

कोर्ट ने इस प्रकरण में आयुर्वेदिक चिकित्सकों, मेडिकल स्टोर संचालक, कंप्यूटर ऑपरेटर और आरजीएचएस योजना के लाभार्थियों सहित कुल 13 आरोपियों के खिलाफ प्रसंज्ञान लेते हुए गिरफ्तारी वारंट जारी कर तलब करने के आदेश दिए हैं। खास बात यह है कि पुलिस ने अपनी जांच में केवल एक कंप्यूटर ऑपरेटर को गिरफ्तार किया था, जबकि शेष सभी संदिग्धों को गवाह बनाकर मामले को हल्का करने का प्रयास किया गया।

 

एपीपी गोवर्धन सिंह ने बताया कि अगस्त 2025 में तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. मनोज कुमार शर्मा की रिपोर्ट के आधार पर कोतवाली थाना में यह मामला दर्ज किया गया था। रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि सरकारी आयुर्वेदिक अस्पताल की परामर्श पर्चियां अस्पताल परिसर में नहीं, बल्कि बाहर स्थित मेडिकल स्टोर पर उपयोग की जा रही थीं। आरजीएचएस कार्डधारकों से ओटीपी लेकर फर्जी पर्चियां बनाई गईं और उनके आधार पर योजना से लाखों रुपये का भुगतान उठा लिया गया।

 

पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कई मरीजों के नाम ओपीडी रजिस्टर में दर्ज ही नहीं थे। इतना ही नहीं, अवकाश पर रहने वाले चिकित्सकों के नाम और उनकी सील का भी दुरुपयोग किया गया। रिकॉर्ड के अनुसार शिवम आयुर्वेदिक ड्रग्स द्वारा आरजीएचएस योजना के तहत करीब 77.34 लाख रुपये की दवाइयों की बिक्री दिखाई गई, जिसमें से 47.84 लाख रुपये केवल डॉ. पवन जांगिड़ की पर्चियों से जुड़े पाए गए। वहीं डॉ. कविता धनकड़ की पर्चियों से भी लाखों रुपये का लेन-देन सामने आया।

 

जांच में यह भी चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि एक ही लाभार्थी ने 53 बार विजिट दिखाकर 2.26 लाख रुपये की दवाइयां लीं। इससे लाभार्थियों की मिलीभगत की आशंका और गहरी हो गई। इसके बावजूद पुलिस ने केवल कंप्यूटर ऑपरेटर जितेंद्र स्वामी को आरोपी बनाया और अन्य को बचाने का प्रयास किया।

 

इस पर सीजेएम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह पूरा मामला धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेजों के उपयोग, राजकोष की राशि के गबन और आपराधिक षड्यंत्र से जुड़ा है। कोर्ट ने जांच अधिकारी की भूमिका को भी संदिग्ध मानते हुए डीजीपी को उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की गंभीर धाराओं में प्रसंज्ञान लिया गया है। मामले की अगली सुनवाई अब 30 जनवरी 2026 को होगी।

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