Edited By Sourabh Dubey, Updated: 14 Apr, 2026 05:34 PM

आज का दौर डिजिटल क्रांति का दौर है, जहां मोबाइल, कंप्यूटर और इंटरनेट ने बच्चों की जीवनशैली को पूरी तरह बदल दिया है। अधिकतर बच्चे अब स्क्रीन में व्यस्त हैं वीडियो गेम्स, सोशल मीडिया और वर्चुअल दुनिया में अपनी पहचान तलाशते हुए जबकि खेल के मैदान...
जयपुर। आज का दौर डिजिटल क्रांति का दौर है, जहां मोबाइल, कंप्यूटर और इंटरनेट ने बच्चों की जीवनशैली को पूरी तरह बदल दिया है। अधिकतर बच्चे अब स्क्रीन में व्यस्त हैं वीडियो गेम्स, सोशल मीडिया और वर्चुअल दुनिया में अपनी पहचान तलाशते हुए जबकि खेल के मैदान धीरे-धीरे खाली होते जा रहे हैं।
इसी बदलते दौर में एक नाम उभरकर सामने आता है Vaibhav Suryavanshi। बिहार के इस 15 वर्षीय युवा क्रिकेटर ने उस उम्र में कमाल कर दिखाया है, जब ज्यादातर बच्चे गली क्रिकेट में खुद को साबित करने की कोशिश करते हैं। वैभव ने Indian Premier League 2026 जैसे बड़े मंच पर अपने खेल से सबका ध्यान खींच लिया है।
जब सामने Jasprit Bumrah और Bhuvneshwar Kumar जैसे अनुभवी गेंदबाज हों, तब बड़े-बड़े बल्लेबाज भी सोच-समझकर खेलते हैं। लेकिन वैभव के खेल में जो निडरता और आत्मविश्वास दिखाई देता है, वह उन्हें अलग बनाता है। उनके लिए हर गेंद एक अवसर है और उस अवसर को भुनाना उनकी खासियत।
यह सवाल स्वाभाविक है कि एक ही उम्र के बच्चों में इतना अंतर क्यों? जवाब केवल प्रतिभा में नहीं, बल्कि सोच, माहौल और अवसर में छिपा है।
आज समाज का बड़ा हिस्सा बच्चों के भविष्य को केवल अंकों और पढ़ाई तक सीमित कर रहा है। स्कूल, कोचिंग और होमवर्क के बीच बच्चों का जीवन सिमट गया है, जबकि खेल और रचनात्मक गतिविधियों को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है।
लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि खेल केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह बच्चों में अनुशासन, धैर्य, संघर्ष और टीमवर्क जैसी अहम गुण विकसित करता है। सबसे महत्वपूर्ण यह आत्मविश्वास पैदा करता है।
वैभव सूर्यवंशी की सफलता इसी सोच को चुनौती देती है। अगर उन्हें भी केवल पढ़ाई तक सीमित रखा जाता, तो शायद देश एक उभरते हुए क्रिकेट सितारे को देखने से वंचित रह जाता।
आज जरूरत है संतुलन की जहां पढ़ाई के साथ खेल और रचनात्मकता को भी समान महत्व दिया जाए। हर बच्चा इंटरनेशनल खिलाड़ी बने, यह जरूरी नहीं है, लेकिन हर बच्चे को खेल का अनुभव जरूर होना चाहिए।
यह कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि समाज के लिए एक आईना है। यह हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपने बच्चों को किस दिशा में ले जा रहे हैं स्क्रीन की सीमित दुनिया में या खुले मैदान के असीम अवसरों की ओर।
अंततः, यह कहना गलत नहीं होगा कि जहां कई बच्चे मोबाइल स्क्रीन पर गेम खेल रहे हैं, वहीं वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा खिलाड़ी मैदान में इतिहास लिख रहे हैं।