Edited By Anil Jangid, Updated: 18 Sep, 2026 07:33 PM

जयपुर। सबको पता है कि नगर निकाय के चुनावों में निर्दलीयों की फौज ने बीजेपी और कांग्रेस की नींद उड़ा दी है. चुनाव जीते जो जीते, लेकिन जो हारे वो भी विधायकों को हलाकान किए हुए हैं क्योंकि उनकी वजह नतीजे उनकी पार्टी के पक्ष में नहीं रहे.
जयपुर। सबको पता है कि नगर निकाय के चुनावों में निर्दलीयों की फौज ने बीजेपी और कांग्रेस की नींद उड़ा दी है. चुनाव जीते जो जीते, लेकिन जो हारे वो भी विधायकों को हलाकान किए हुए हैं क्योंकि उनकी वजह नतीजे उनकी पार्टी के पक्ष में नहीं रहे. अब अपनी ही पार्टी के नेता और कार्यकर्ताओं से क्या कहें, क्योंकि ढ़ाई साल बाद चुनाव जो होने हैं...पार्षदों की हार-जीत के चक्कर में विधायकी और भविष्य की टिकट पर फर्क न पड़ जाए, लिहाज़ा, अपनी हार का ठीकरा अब अफसरों के सिर फोड़ने में लगे हैं. कई विधायकों ने अभी से ही भारतीय जनता पार्टी संगठन और सरकार में अपने-अपने तरीके से ये बात पहुंचानी शुरू कर दी है कि अधिकारियों ने ‘निष्पक्ष’ (बोलना है इनवर्टटेट कोमा में) रूप से अपनी भूमिका नहीं निभाई. इसीलिए कई वार्डों में हमारा मार्जिन कम रहा या हार की वजह बन गया.
निकाय चुनाव के बाद मंत्रीमंडल विस्तार-फेरबदल, राजनीतिक नियुक्तियों का दौर चल सकता है. और ढ़ाई साल बाद टिकट का भी दांव है. इसीलिए जयपुर समेत पूरे राजस्थान के विधायकों ने अपने-अपने तरीके से हार का कारण तलाश लिए हैं. और इसका नतीजा यह होगा कि आचार संहिता खत्म होते ही अफसरों की तबादलों की ऐसी लिस्ट आ सकती है जो पूरे प्रशासनिक अमले को उथल-पुथल कर दे. जयपुर के परिणामों को देखें तो अंतिम नतीजों में बीजेपी को 78, कांग्रेस 57 और निर्दलीयों को 15 वार्ड मिले. 150 वार्डों के निगम बोर्ड में बहुमत के लिए 76 सीटें चाहिए थी, इस लिहाज से बीजेपी ने यहां बाजी जीत ली. लेकिन विधायकों के इलाकों के हिसाब से देखें उनकी परफोर्मेंस को लेकर आला नेताओँ ने भृकुटि तान रखी हैं.
सांगानेर जो मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का जोन है. यहां भारतीय जनता पार्टी का अच्छा प्रदर्शन रहा है. या यूं कहें कि सबसे मजबूत भारतीय जनता पार्टी यहीं दिखी है. विद्याधर नगर के 22 वार्डों में 12 भारतीय जनता पार्टी ने जीती हैं जबकि कांग्रेस और निर्दलीय मिलाकर दस वार्ड विपक्ष को मिली हैं. उधर, राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ की विधानसभा में 15 वार्डों में 7 बीजेपी के पक्ष में वार्ड गए हैं जबकि 8 कांग्रेस और निर्दलीय के पक्ष में वार्ड गया है. झोटवाड़ा के हालात पार्टी के लिए अलार्मिंग हैं, वो नजर आता है. मालवीय नगर में 15 वार्ड जीत कर कालीचरण सर्राफ ने अपना दबदबा बनाए रखा है लेकिन टिकट वितरण के दौरान सिंबल को लेकर हुई उलझन ने उन्हें विवादों में ला दिया है. हवामहल के 15 वार्डों में भारतीय जनता पार्टी को 8 वार्ड मिले हैं. यहां कांग्रेस और निर्दलीय मिलाकर सात वार्ड ले गए. कैलाश वर्मा के बगरू में कांग्रेस ने 8 वार्ड और बीजेपी 6 वार्ड पर आ गई. ये यकीकन कैलाश वर्मा के लिए करारा झटका है.
वहीं सिविल लाइंस में भी गोपाल शर्मा की मौजूदगी में कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियों में टाई रहा. यहां 8-8 सीटें दोनों को मिली, लेकिन बीजेपी के लिए ये विधानसभा क्षेत्र प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ था. स्थिति कांग्रेस में भी कुछ अलग नहीं. यहां आदर्श नगर में रफीक खान अपना दबदबा बनाए रखने में कामयाब रहे वहीं किशनपोल में अमीउद्दीन काग़जी परफोर्मेंस में पीछे रह गए. यहां बीजेपी को 6 और कांग्रेस को 4 वार्ड मिले. जबकि चार वार्डों में निर्दलीय बाजी मार गए. आमेर में प्रशांत शर्मा को भी ज्यादा कुछ नहीं मिला. तीन वार्डों में एक-एक वार्ड कांग्रेस-बीजेपी को और एक वार्ड निर्दलीय के हिस्से आया. अब नुकसान हुआ है तो कांग्रेस के विधायक कहने लगे हैं कि बीजेपी ने गड़बड़िया की हैं और भाजपा के विधायक कहने लगे है कि अधिकारियों ने गडबड़ियां की हैं. असल में, उनकी विधानसभा में उनके समीकरण जो गड़बड़ा रहे हैं, सवाल पर उस पर हैं...जवाब जिन्हें लेने हैं वो जानते हैं कि असल गड़बड़ी कहां हुई हैं या हो रही हैं.