कसौटीनाथ महादेव मंदिर, बीकानेर: जहां हुमायूं ने ली थी शरण, नाथ संतों की तपोस्थली बनी आस्था का केंद्र

Edited By Kuldeep Kundara, Updated: 15 Feb, 2026 04:29 PM

kasautinath mahadev temple bikaner where humayun took refuge

बीकानेर का कसौटीनाथ महादेव मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि इतिहास का साक्षी भी है। माना जाता है कि शेरशाह सूरी से हार के बाद हुमायूं ने यहां शरण ली थी। जानिए मंदिर का इतिहास, नाथ संप्रदाय से जुड़ाव और इसकी विशेषताएं।

राजस्थान के बीकानेर में स्थित कसौटीनाथ महादेव मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय का साक्षी भी है। मान्यता है कि 16वीं शताब्दी में जब मुगल सम्राट हुमायूं को शेरशाह सूरी से पराजय का सामना करना पड़ा, तब वे गुप्त मार्ग से भागते हुए बीकानेर पहुंचे और इस मंदिर में शरण ली। मंदिर परिसर में लगे सरकारी सूचना बोर्ड पर भी इस ऐतिहासिक प्रसंग का उल्लेख मिलता है, जो इसकी प्रमाणिकता को बल देता है। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर यह मंदिर विशेष रूप से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन जाता है।

महाराजा गज सिंह ने करवाया पुनरुद्धार

कसौटीनाथ महादेव मंदिर की स्थापना 16वीं शताब्दी में मानी जाती है। बाद में 17वीं शताब्दी में बीकानेर के शासक महाराजा गज सिंह ने इसका पुनरुद्धार करवाया। पुनरुद्धार के दौरान मंदिर को भव्य स्वरूप प्रदान किया गया और ऊपरी मंजिल पर गजपतेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना की गई।

खुले आकाश के नीचे विराजते हैं गजपतेश्वर महादेव

गजपतेश्वर महादेव मंदिर की सबसे अनोखी विशेषता यह है कि यह खुले आकाश के नीचे स्थित है और इस पर कोई छत नहीं है। यहां स्थापित शिवलिंग के साथ श्रीयंत्र भी विराजमान है, जो इस स्थल के आध्यात्मिक महत्व को और बढ़ाता है। खुले वातावरण में पूजा-अर्चना श्रद्धालुओं को विशेष शांति का अनुभव कराती है।

नाथ संप्रदाय की तपोस्थली

यह मंदिर नाथ संप्रदाय के संतों की साधना भूमि भी रहा है। मंदिर परिसर में लगभग छह फीट गहरी एक गुफा स्थित है, जहां संत-महात्माओं ने वर्षों तक तपस्या की। मंदिर के पुजारी मनोज सेवग के अनुसार, यहां कई सिद्ध संतों ने कठोर साधना कर आध्यात्मिक ऊंचाइयों को प्राप्त किया।

माता चामुंडा और नाथसागर तालाब

मुख्य गर्भगृह में कसौटीनाथ महादेव विराजमान हैं। परिसर में गजपतेश्वर महादेव के साथ माता चामुंडा का मंदिर भी स्थित है, जो एक गुफा के रूप में पीछे की ओर बना हुआ है। मंदिर के नीचे कभी माता काली का मंदिर भी था, जो वर्तमान में बंद है। परिसर में स्थित नाथसागर तालाब जमीन से लगभग 30 फीट नीचे है और इसे संतों का स्नान स्थल माना जाता है। यह तालाब आज भी इस स्थल की प्राचीनता और आध्यात्मिक परंपरा का प्रमाण है।

30 फीट ऊंचाई पर स्थित भव्य मंदिर

कसौटीनाथ महादेव मंदिर जमीन से करीब 30 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, जो इसकी स्थापत्य शैली को विशिष्ट बनाता है। तीन दशकों से यहां पूजा-अर्चना कर रहे विजय बोड़ा के अनुसार, मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को विशेष सकारात्मक ऊर्जा और शांति का अनुभव होता है। स्थानीय इतिहासकारों का मानना है कि यह मंदिर मुगल काल और बीकानेर राज परिवार के इतिहास से भी गहराई से जुड़ा रहा है।

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