खेजड़ी आंदोलन: संतों की तबीयत बिगड़ने पर सरकार हरकत में, अनशन तुड़वाने बीकानेर पहुंचे मंत्री केके बिश्नोई

Edited By Anil Jangid, Updated: 05 Feb, 2026 01:29 PM

khejri andolan minister kk bishnoi reaches bikaner

बीकानेर. राजस्थान के बीकानेर में चल रहा खेजड़ी बचाओ आंदोलन अब गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। लगातार अनशन कर रहे संतों और आंदोलनकारियों की तबीयत बिगड़ने के बाद राज्य सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर...

बीकानेर. राजस्थान के बीकानेर में चल रहा खेजड़ी बचाओ आंदोलन अब गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। लगातार अनशन कर रहे संतों और आंदोलनकारियों की तबीयत बिगड़ने के बाद राज्य सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर गुरुवार को मंत्री केके बिश्नोई बीकानेर पहुंचे और अनशन स्थल पर आंदोलनकारियों से वार्ता शुरू की। सरकार की इस पहल को आंदोलन समाप्त कराने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

 

मंत्री केके बिश्नोई के साथ स्थानीय विधायक पब्बा राम विश्नोई, जसवंत विश्नोई और भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बिहारी विश्नोई भी मौजूद रहे। सभी जनप्रतिनिधियों ने अनशन कर रहे संतों, महिलाओं और पर्यावरण संघर्ष समिति के पदाधिकारियों से मुलाकात की और उनकी मांगों को विस्तार से सुना। मंत्री ने आंदोलनकारियों को आश्वासन दिया कि सरकार खेजड़ी संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार करेगी।

 

इस दौरान अनशन स्थल पर उस समय हड़कंप मच गया जब सभा को संबोधित कर रहे गोरधन महाराज के कार्यक्रम के बीच अनशनकारी मुखराम धरणीया अचानक अचेत हो गए। इसके अलावा एक महिला आंदोलनकारी की भी तबीयत बिगड़ गई। दोनों को तुरंत मंच के पीछे बनाए गए अस्थायी चिकित्सा केंद्र में ले जाया गया। इससे पहले बुधवार को भी अनशनकारी संत लालदास और मांगीलाल की हालत बिगड़ने पर उन्हें बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

 

पर्यावरण संघर्ष समिति के नेताओं परसराम विश्नोई, रामगोपाल विश्नोई और सुभाष विश्नोई ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं देती, तब तक अनशन समाप्त नहीं किया जाएगा। नेताओं का कहना है कि खेजड़ी वृक्ष राजस्थान की पहचान और पर्यावरण संतुलन का प्रतीक है, लेकिन इसके बावजूद बड़े पैमाने पर कटाई और उपेक्षा हो रही है।

 

उल्लेखनीय है कि खेजड़ी संरक्षण और ट्री प्रोटेक्शन कानून बनाने की मांग को लेकर बीकानेर कलेक्ट्रेट के सामने चल रहा यह महापड़ाव चौथे दिन भी जारी रहा। आंदोलन में 29 संतों, 60 महिलाओं सहित कुल 458 पर्यावरण प्रेमी अन्न-जल त्याग कर अनशन पर बैठे हुए हैं। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।

Related Story

    Trending Topics

    img title
    img title

    Be on the top of everything happening around the world.

    Try Premium Service.

    Subscribe Now!