Jodhpur में लोगों के पास वैध दस्तावेज, फिर भी अपनी जमीन से दूर जनता

Edited By Anil Jangid, Updated: 25 Jun, 2026 02:24 PM

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जोधपुर। जोधपुर के महावीर नगर पाल विकास समिति से जुड़े सैकड़ों भूखण्ड स्वामियों ने अपनी ही संपत्तियों तक पहुंच नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन के सामने न्याय की गुहार लगाई है।

जोधपुर। जोधपुर के महावीर नगर पाल विकास समिति से जुड़े सैकड़ों भूखण्ड स्वामियों ने अपनी ही संपत्तियों तक पहुंच नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन के सामने न्याय की गुहार लगाई है। समिति ने जिला कलेक्टर, जेडीए आयुक्त और पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन सौंपकर भूखण्डों पर सुरक्षित पहुंच और कब्जा दिलाने की मांग की है।

 

समिति के अनुसार ग्राम पाल स्थित खसरा संख्या 93 एवं 93/1 में विकसित आवासीय कॉलोनी के भूखण्ड स्वामियों के पास वैध पट्टे, पंजीकृत विक्रय विलेख और अन्य आवश्यक राजस्व दस्तावेज मौजूद हैं। समिति का दावा है कि वर्ष 1985 में भूमि उपयोग परिवर्तन भी सक्षम प्राधिकारी से स्वीकृत हो चुका है तथा अब तक किसी सक्षम न्यायालय की ओर से इस भूमि को लेकर कोई स्थगन आदेश जारी नहीं हुआ है।

 

इसके बावजूद समिति का आरोप है कि कुछ असामाजिक तत्वों ने कॉलोनी क्षेत्र में अतिक्रमण कर लिया है और वास्तविक भूखण्ड स्वामियों को उनकी जमीन तक पहुंचने से रोका जा रहा है। भूखण्ड स्वामियों का कहना है कि पूर्व में उनकी चारदीवारी और अन्य संरचनाओं को नुकसान पहुंचाया गया था, जिसके संबंध में पुलिस ने मामला दर्ज कर न्यायालय में आरोप-पत्र भी पेश किया, लेकिन इसके बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ।

 

समिति का कहना है कि जब कॉलोनी क्षेत्र में सीमांकन, नाप-चौक और विकास कार्यों की पहल की गई तो संबंधित लोगों को कथित रूप से धमकाकर मौके से बाहर कर दिया गया। हाल में जेसीबी और ट्रैक्टर से पुराने सीमांकन चिन्ह और पत्थरों को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप लगाया गया है।

 

भूखण्ड स्वामियों ने प्रशासन पर शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे अतिक्रमण करने वालों के हौसले बढ़ रहे हैं और वैध स्वामी भय और असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर हैं।

 

ज्ञापन में मांग की गई है कि भूखण्ड स्वामियों को उनकी संपत्तियों तक निर्भय पहुंच सुनिश्चित की जाए, क्षेत्र में पुलिस सुरक्षा दी जाए, अतिक्रमण हटाकर दोषियों पर कार्रवाई हो तथा संबंधित विभागों की भूमिका की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए। समिति ने चेतावनी दी है कि जल्द समाधान नहीं होने पर वे उच्च प्रशासनिक और न्यायिक मंचों का सहारा लेंगे।

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