कमलेश प्रजापति एनकाउंटर मामला: IPS आनंद शर्मा सहित 24 पुलिसकर्मियों को राहत, जोधपुर सेशन कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द किया

Edited By Anil Jangid, Updated: 19 Jun, 2026 03:07 PM

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जोधपुर/बाड़मेर : बाड़मेर के चर्चित कमलेश प्रजापति एनकाउंटर मामले में जोधपुर महानगर सेशन कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है। इस फैसले के साथ ही तत्कालीन बाड़मेर एसपी रहे IPS आनंद शर्मा सहित 24 पुलिस अधिकारियों और...

जोधपुर/बाड़मेर : बाड़मेर के चर्चित कमलेश प्रजापति एनकाउंटर मामले में जोधपुर महानगर सेशन कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है। इस फैसले के साथ ही तत्कालीन बाड़मेर एसपी रहे IPS आनंद शर्मा सहित 24 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को राहत मिल गई है।

 

सेशन कोर्ट ने अपने आदेश में माना कि घटना के दौरान कमलेश प्रजापति ने पुलिस टीम से बचकर भागने का प्रयास किया था और इस दौरान उसने पुलिस पर वाहन चढ़ाने की कोशिश भी की थी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस द्वारा की गई फायरिंग आत्मरक्षा और एक हेड कांस्टेबल की जान बचाने के उद्देश्य से की गई जवाबी कार्रवाई थी।

 

कोर्ट ने उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज, एफएसएल रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर कहा कि इस घटना को फर्जी एनकाउंटर नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी माना कि पुलिस की कार्रवाई परिस्थितियों के अनुरूप और आवश्यक थी।

 

यह मामला 22 अप्रैल 2021 का है, जब बाड़मेर जिले के सदर थाना क्षेत्र में कमलेश प्रजापति का पुलिस एनकाउंटर हुआ था। घटना के बाद इलाके में भारी विरोध प्रदर्शन हुए थे और राजनीतिक स्तर पर भी यह मुद्दा काफी गरमाया था। तत्कालीन पचपदरा विधायक मदन प्रजापत और प्रजापति समाज के लोगों की मांग पर राज्य सरकार ने मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी थी।

 

सीबीआई ने अपनी जांच में पुलिस कार्रवाई को सही मानते हुए क्लोजर रिपोर्ट अदालत में पेश की थी और सभी पुलिसकर्मियों को क्लीन चिट दी थी। हालांकि, मृतक की पत्नी ने इस रिपोर्ट को चुनौती दी थी, जिसके बाद ट्रायल कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया और हत्या का संज्ञान ले लिया था।

 

इसके बाद पुलिस अधिकारियों ने ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ सेशन कोर्ट में निगरानी याचिका दायर की थी। लंबी सुनवाई के बाद सेशन कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का आदेश निरस्त कर दिया।

 

इस फैसले को पुलिस पक्ष के लिए एक बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है, जबकि मामले से जुड़ी आगे की कानूनी प्रक्रिया अब उच्च न्यायिक स्तर पर तय होगी।

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