बिजली बचत से होगा स्मार्ट ग्रिड प्रबंधन, जयपुर डिस्कॉम ने शुरू किया अनूठा पायलट प्रोजेक्ट

Edited By Sourabh Dubey, Updated: 20 Jun, 2026 05:56 PM

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बिजली की बढ़ती मांग और ग्रिड पर पड़ने वाले दबाव को कम करने के लिए जयपुर डिस्कॉम ने एक अभिनव पहल शुरू की है। प्रौद्योगिकी कंपनी फ्लॉक एनर्जी के सहयोग से डिस्कॉम ने घरेलू उपभोक्ताओं के एयर कंडीशनर (AC) में निःशुल्क स्मार्ट आईओटी (IoT) डिवाइस लगाने का...

जयपुर। बिजली की बढ़ती मांग और ग्रिड पर पड़ने वाले दबाव को कम करने के लिए जयपुर डिस्कॉम ने एक अभिनव पहल शुरू की है। प्रौद्योगिकी कंपनी फ्लॉक एनर्जी के सहयोग से डिस्कॉम ने घरेलू उपभोक्ताओं के एयर कंडीशनर (AC) में निःशुल्क स्मार्ट आईओटी (IoT) डिवाइस लगाने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। प्रारंभिक चरण में वैशाली नगर, मानसरोवर और मालवीय नगर क्षेत्र के करीब 2,000 उपभोक्ताओं को इस योजना से जोड़ा जा रहा है।

यह देश की पहली ऐसी परियोजना मानी जा रही है, जिसमें किसी विद्युत वितरण निगम द्वारा घरेलू क्षेत्र की बिजली खपत को ऑटोमेटेड डिमांड रिस्पांस (ADR) तकनीक के माध्यम से नियंत्रित किया जाएगा। इस तकनीक का उद्देश्य पीक ऑवर्स के दौरान बिजली की खपत को संतुलित करना और ग्रिड को ओवरलोड होने से बचाना है।

 कैसे काम करेगी स्मार्ट आईओटी डिवाइस?

एडीआर तकनीक आधारित यह डिवाइस दो हिस्सों में काम करती है। एक स्मार्ट प्लग यूनिट घर के विद्युत सॉकेट में लगाई जाती है, जबकि दूसरी यूनिट एयर कंडीशनर पर स्थापित की जाती है। यह पूरा सिस्टम घर के वाई-फाई नेटवर्क के जरिए ग्रिड मैनेजमेंट सिस्टम से जुड़ा रहता है।

जब बिजली की मांग अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचती है, तब यह डिवाइस कमरे के अनुकूल तापमान को बनाए रखते हुए एसी के तापमान में लगभग 1 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि कर देती है। इससे उपभोक्ता को आराम में कोई विशेष अंतर महसूस नहीं होता, लेकिन बिजली की खपत में उल्लेखनीय कमी आ जाती है।

 6 प्रतिशत तक बिजली बचत का दावा

डिस्कॉम के अनुसार यदि कोई उपभोक्ता प्रतिदिन 6 से 8 घंटे एसी का उपयोग करता है, तो इस तकनीक के माध्यम से बिजली की खपत में 3 से 6 प्रतिशत तक की कमी लाई जा सकती है। इससे उपभोक्ताओं के बिजली बिल में भी बचत होगी।

 1 मेगावाट तक कम हो सकती है बिजली की मांग

जयपुर डिस्कॉम का अनुमान है कि 2,000 उपभोक्ताओं के एसी को इस तकनीक से जोड़ने पर पीक ऑवर्स में बिजली की मांग लगभग 1 मेगावाट तक कम की जा सकती है। इससे ग्रिड पर दबाव घटेगा, फॉल्ट और ट्रिपिंग की घटनाओं में कमी आएगी तथा उपभोक्ताओं को बेहतर वोल्टेज के साथ निर्बाध बिजली आपूर्ति मिल सकेगी।

 राजस्थान में स्मार्ट ऊर्जा प्रबंधन की दिशा में बड़ा कदम

यह परियोजना राजस्थान विद्युत नियामक आयोग के डिमांड फ्लेक्सिबिलिटी एवं डिमांड साइड मैनेजमेंट विनियम-2026 के तहत शुरू की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है तो भविष्य में इसे बड़े स्तर पर लागू किया जा सकता है, जिससे बिजली बचत के साथ-साथ राज्य की ऊर्जा व्यवस्था और अधिक स्मार्ट एवं प्रभावी बन सकेगी।
 

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