Edited By Anil Jangid, Updated: 18 Jun, 2026 05:49 PM

जयपुर। राजस्थान कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। बायतु से विधायक और मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी Harish Chaudhary ने पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot के साथ अपने रिश्तों को लेकर बड़ा बयान दिया है, जिससे प्रदेश की राजनीति...
जयपुर। राजस्थान कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। बायतु से विधायक और मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी Harish Chaudhary ने पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot के साथ अपने रिश्तों को लेकर बड़ा बयान दिया है, जिससे प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है।
बाड़मेर जिले में आयोजित वीर तेजाजी मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के दौरान हरीश चौधरी ने सार्वजनिक मंच से अपनी बात रखते हुए स्वीकार किया कि लोकसभा चुनाव के बाद से उनके और अशोक गहलोत के बीच “रामा-श्यामा” यानी सामान्य संवाद भी बंद है। उनके इस बयान के बाद कांग्रेस के भीतर चल रही पुरानी गुटबाज़ी एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
चौधरी ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि अब दोनों नेताओं के बीच सीधा संवाद नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि यदि कोई संदेश आता भी है तो वह केवल माध्यमों के जरिए मिलता है, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर कोई बातचीत नहीं होती।
यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में Rahul Gandhi की कोटा यात्रा के दौरान अशोक गहलोत और सचिन पायलट एक साथ सार्वजनिक मंच पर दिखाई दिए थे, जिससे कांग्रेस के भीतर “सब कुछ ठीक है” का संदेश देने की कोशिश की गई थी। लेकिन हरीश चौधरी के बयान ने इस धारणा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार, चौधरी और गहलोत के बीच मतभेद लंबे समय से चले आ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर टिकट वितरण, संगठनात्मक फैसलों और कुछ नेताओं की वापसी जैसे मुद्दों पर दोनों के बीच असहमति रही है। खासकर बाड़मेर-बायतु क्षेत्र की राजनीति में प्रभाव और नेतृत्व को लेकर मतभेद अधिक गहराते गए।
चौधरी ने इससे पहले भी कई बार पार्टी के अंदरूनी फैसलों पर सवाल उठाए हैं। वे कई मौकों पर संगठनात्मक पारदर्शिता और युवाओं के हितों की बात करते रहे हैं, जिससे पार्टी के भीतर अलग-अलग गुटों में तनाव बढ़ता रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान केवल व्यक्तिगत संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि राजस्थान कांग्रेस में चल रहे गुटीय संघर्ष की एक झलक भी है। गहलोत-पायलट विवाद के बीच अब अन्य नेताओं की असहमति भी खुलकर सामने आने लगी है, जिससे संगठनात्मक एकता पर असर पड़ सकता है।
हालांकि हरीश चौधरी ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि वे जनता के प्रति जवाबदेह हैं और किसी भी तरह की “पर्दे के पीछे की राजनीति” का हिस्सा नहीं रहे हैं। उन्होंने खुद को जनता से जुड़ा नेता बताते हुए कहा कि उनका राजनीतिक आधार जनता है, न कि कोई परिवारिक या गॉडफादर सिस्टम।
इस पूरे घटनाक्रम ने राजस्थान की राजनीति को एक बार फिर गर्मा दिया है। कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान अब सार्वजनिक मंचों तक पहुंचने लगी है, जिससे आने वाले समय में संगठनात्मक संतुलन बनाए रखना पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।