Edited By Anil Jangid, Updated: 19 Jun, 2026 10:45 AM

बाड़मेर। राजस्थान के पश्चिमी सीमावर्ती जिले Barmer में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास अवैध निर्माणों को हटाने के लिए प्रशासन द्वारा बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई के तहत सीमा सुरक्षा बल Border Security Force और राजस्व विभाग...
बाड़मेर। राजस्थान के पश्चिमी सीमावर्ती जिले Barmer में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास अवैध निर्माणों को हटाने के लिए प्रशासन द्वारा बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई के तहत सीमा सुरक्षा बल Border Security Force और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने सीमावर्ती 15 किलोमीटर के दायरे में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाते हुए कई अवैध ढांचों को ध्वस्त कर दिया।
यह कार्रवाई गुरुवार को गडरारोड़ और चौहटन क्षेत्र में की गई, जहां मालाणा, हमीरानी, केरकोरी, बाखासर के समेलो का तला, भलगांव और डेम्बा गांवों में चिन्हित अवैध निर्माणों को बुलडोजर और जेसीबी मशीनों की मदद से पूरी तरह हटा दिया गया। प्रशासन का कहना है कि यह अभियान राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किया गया है और इससे पहले सभी भू-स्वामियों को कानूनी नोटिस जारी कर 18 जून तक स्वयं निर्माण हटाने का समय दिया गया था।
सूत्रों के अनुसार, जब निर्धारित समय सीमा तक अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो पुलिस, राजस्व टीम और बीएसएफ जवानों ने संयुक्त रूप से मौके पर पहुंचकर कार्रवाई को अंजाम दिया। यह पूरा अभियान पूर्व नियोजित सर्वेक्षण के आधार पर चलाया गया था, जिसमें तहसीलदार स्तर पर विस्तृत भौतिक जांच की गई थी।
हालांकि इस कार्रवाई के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में राजनीतिक विवाद भी गहराने लगा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Harish Chaudhary ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार जानबूझकर सीमावर्ती इलाकों को राजनीतिक एजेंडे के रूप में इस्तेमाल कर रही है और स्थानीय लोगों के साथ अन्याय किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना उचित पुनर्वास व्यवस्था के लोगों के घरों को तोड़ना मानवीय दृष्टि से सही नहीं है।
वहीं बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा क्षेत्र के सांसद Umedaram Beniwal ने भी प्रभावित ग्रामीणों के समर्थन में आवाज उठाई और मौके पर पहुंचकर प्रशासनिक कार्रवाई पर नाराजगी व्यक्त की। कांग्रेस के अन्य स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी इस कार्रवाई की टाइमिंग और तरीके पर सवाल खड़े किए हैं।
प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह कानून के तहत की गई है और इसका उद्देश्य सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है। अधिकारियों के अनुसार, सीमावर्ती 15 किलोमीटर का इलाका अत्यंत संवेदनशील है, जहां किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।
फिलहाल इस कार्रवाई के बाद सीमावर्ती गांवों में तनाव और असंतोष का माहौल देखा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से इन इलाकों में रह रहे हैं और अचानक घरों को गिराया जाना उनके लिए बड़ा झटका है। वहीं प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां इसे राष्ट्रीय सुरक्षा की अनिवार्य कार्रवाई बता रही हैं।