Edited By Anil Jangid, Updated: 27 Jun, 2026 12:32 PM

भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे राजस्थान के सरहदी जिलों में सुरक्षा के लिहाज से एक बेहद बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। बॉर्डर पर संदिग्ध गतिविधियों को रोकने और स्थानीय नागरिकों की सही पहचान सुनिश्चित करने के लिए सरकार ऑपरेशन क्लीन शुरु...
जैसलमेर: भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे राजस्थान के सरहदी जिलों में सुरक्षा के लिहाज से एक बेहद बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। बॉर्डर पर संदिग्ध गतिविधियों को रोकने और स्थानीय नागरिकों की सही पहचान सुनिश्चित करने के लिए सरकार ऑपरेशन क्लीन शुरु कर दिया है। जिसके तहत पहले भवनों व निर्माण का सर्वे होने के बाद सीमा से सटे 50 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले हर नागरिक का मैन-टू-मैन डिजिटल सर्वे किया जाएगा।
इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत इसका पूरी तरह डिजिटल और इंटरलिंक्ड होना है। जिसमें पूरे परिवार का एक डिजिटल कार्ड बनेगा, जिसमें परिवार के सभी सदस्यों का पूरा विवरण दर्ज होगा। इस डिजिटल कार्ड को नागरिक के आधार कार्ड से लिंक किया जाएगा, जिससे डेटा में किसी भी प्रकार की हेराफेरी या फर्जीवाड़ा मुमकिन नहीं होगा। आधार और डिजिटल कार्ड के आपस में लिंक होने से सुरक्षा एजेंसियों को सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि यदि बॉर्डर के किसी नागरिक पर कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज है या उसकी गतिविधियां संदिग्ध हैं, तो उसका पूरा क्रिमिनल रिकॉर्ड एक क्लिक पर सामने आ जाएगा।
पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर जैसे सीमावर्ती जिलों में कई बार यह बात सामने आती है कि बाहरी लोग गाइड या श्रमिक बनकर बॉर्डर के गांवों में छिप जाते हैं और देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देते हैं। इस डिजिटल सर्वे के पूरे होने के बाद, सीमा क्षेत्र में रहने वाले हर वैध नागरिक का डेटाबेस तैयार हो जाएगा। सरकार की मंशा के अनुरूप अंतरराष्ट्रीय सीमा से भीतर की तरफ 50 किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी गांवों, ढाणियों और कस्बों को इस अभियान में शामिल किया गया है। ऑपरेशन क्लीन के तहत पुलिस और प्रशासनिक टीमें घर-घर जाकर सर्वे करेंगी। इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य बॉर्डर पर रह रहे मूल निवासियों की सटीक शिनाख्त करना है, ताकि बाहरी या संदिग्ध तत्वों की पहचान आसानी से की जा सके।