Edited By Afjal Khan, Updated: 07 Mar, 2026 04:07 PM

राजस्थान के बांदीकुई रेलवे स्टेशन पर शनिवार शाम रेल कर्मचारियों ने लोको पायलट के 23 पदों को अन्य स्थानों पर स्थानांतरित किए जाने के फैसले के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने अजमेर-जम्मूतवी पूजा सुपरफास्ट ट्रेन के...
राजस्थान के बांदीकुई रेलवे स्टेशन पर शनिवार शाम रेल कर्मचारियों ने लोको पायलट के 23 पदों को अन्य स्थानों पर स्थानांतरित किए जाने के फैसले के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने अजमेर-जम्मूतवी पूजा सुपरफास्ट ट्रेन के सामने नारेबाजी करते हुए रेलवे प्रशासन के निर्णय पर नाराजगी जताई।
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना था कि यह फैसला बांदीकुई लोको लॉबी के साथ अन्याय है और इससे यहां के रेलवे ढांचे के साथ-साथ कर्मचारियों के हितों पर भी असर पड़ेगा। कर्मचारियों ने मांग की कि स्थानांतरित किए गए पदों को वापस बांदीकुई में ही बहाल किया जाए।
कैडर रिव्यू में बढ़े थे पद
रेल कर्मचारियों के अनुसार, वर्ष 2025 के कैडर रिव्यू में बांदीकुई में कुल 24 लोको पायलट पदों की वृद्धि की गई थी। इनमें 1 लोको पायलट मेल, 5 लोको पायलट सवारी गाड़ी, 7 लोको पायलट मालगाड़ी, 9 वरिष्ठ सहायक लोको पायलट और 2 सहायक लोको पायलट के पद शामिल थे।
हालांकि कर्मचारियों का आरोप है कि बाद में हुई पिन-पॉइंटिंग प्रक्रिया के दौरान इन 24 में से 23 पद स्थायी रूप से अन्य जगहों पर भेज दिए गए। इनमें 1 लोको पायलट मेल और 5 सवारी गाड़ी लोको पायलट के पद जयपुर स्थानांतरित कर दिए गए।
इसके अलावा 5 लोको पायलट मालगाड़ी, 10 वरिष्ठ सहायक लोको पायलट और 2 सहायक लोको पायलट के पद न्यू फुलेरा शिफ्ट कर दिए गए।
लोको लॉबी के साथ भेदभाव का आरोप
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि बांदीकुई लोको लॉबी के साथ लगातार भेदभाव किया जा रहा है। उनका कहना है कि इससे पहले भी मेल ट्रेन से जुड़ी तीन पोस्ट यहां से जयपुर ट्रांसफर की जा चुकी हैं।
कर्मचारियों के अनुसार, बांदीकुई-टूंडला बीट का संचालन भी अब स्थानीय स्टाफ की बजाय एनसीआर के क्रू से कराया जा रहा है, जबकि पहले यह जिम्मेदारी बांदीकुई के कर्मचारियों के पास ही रहती थी।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
संयुक्त मोर्चे के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन में कर्मचारियों ने कहा कि लगातार पदों का स्थानांतरण बांदीकुई के रेलवे ढांचे को कमजोर करने की कोशिश है। उनका आरोप है कि यह कदम यहां के रेलवे अस्तित्व को धीरे-धीरे खत्म करने की साजिश जैसा है।
कर्मचारियों ने यह भी कहा कि पिन-पॉइंटिंग प्रक्रिया से पहले रेलवे प्रशासन ने किसी भी ट्रेड यूनियन से चर्चा नहीं की, जिससे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्थानांतरित पदों को वापस नहीं लाया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।