नागौर में बदली समाज की तस्वीर, बालिकाओं ने लहराया परचम

Edited By Anil Jangid, Updated: 24 Jan, 2026 01:23 PM

changing social landscape in nagaur as girls lead the way to success

नागौर। नागौर जिले की सामाजिक तस्वीर तेजी से बदल रही है और इस बदलाव की सबसे मजबूत पहचान बनी है यहां की बेटियां। कभी शिक्षा तक सीमित पहुंच रखने वाली बालिकाएं आज स्कूल से निकलकर कॉलेज, विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंचों तक अपनी उपस्थिति...

नागौर। नागौर जिले की सामाजिक तस्वीर तेजी से बदल रही है और इस बदलाव की सबसे मजबूत पहचान बनी है यहां की बेटियां। कभी शिक्षा तक सीमित पहुंच रखने वाली बालिकाएं आज स्कूल से निकलकर कॉलेज, विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंचों तक अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। आंकड़ों के अनुसार अब स्कूलों और कॉलेजों में छात्रों की तुलना में छात्राओं का नामांकन अधिक है और सफलता का प्रतिशत भी बेटियों का ज्यादा है। गांव स्तर पर खुले अच्छे स्कूल और सरकारी गल्र्स कॉलेज इस परिवर्तन के मजबूत आधार बने हैं, जिन्होंने ग्रामीण बालिकाओं के सपनों को पंख दिए हैं।

 

नागौर की बेटियां अब सिर्फ शिक्षा ही नहीं, बल्कि प्रशासन, विज्ञान, खेल, चिकित्सा और रक्षा जैसे क्षेत्रों में भी जिले और देश का नाम रोशन कर रही हैं। आईएएस, आईपीएस और आईआरएस जैसी सेवाओं से लेकर भारतीय नौसेना, अर्जुन अवॉर्ड और चंद्रयान-3 जैसे ऐतिहासिक अभियानों तक, नागौर की बालिकाओं ने यह साबित किया है कि अवसर और विश्वास मिले तो वे हर चुनौती को अवसर में बदल सकती हैं।

 

राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर यह बदलाव केवल उपलब्धियों की कहानी नहीं, बल्कि उस सामाजिक चेतना का प्रतीक है, जहां बेटियों को बराबरी, सम्मान और आगे बढऩे का हक मिल रहा है। नागौर की बेटियां आज आत्मविश्वास के साथ मुस्कुराते हुए भविष्य की ओर बढ़ रही हैं और उनके साथ आगे बढ़ रहा है पूरा समाज।

 

अब शिक्षा के क्षेत्र में आई जागरुकता के चलते नागौर की बेटियां, बेटों से आगे निकल रही हैं। कोई शिक्षा के क्षेत्र में अपना नाम रोशन कर रही है तो कोई खेल क्षेत्र में, कोई भारतीय प्रशासनिक सेवा में अपना प्रभाव छोड़ रही है तो कोई सेना के क्षेत्र में देश की रक्षा के लिए तैनात है। बात चाहे आरुषि मलिक की हो या फिर नेहरा बहनों की, प्रदेश के साथ देशभर में अपनी विशेष छाप छोड़ रही हैं।

- मूल रूप से नागौर के खजवाना गांव की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आरुषि मलिक राजस्थान राज्य भंडारण निगम में प्रबंध निदेशक का पद संभाल रही हैं।

- डीडवाना-कुचामन जिले की निधि चौधरी महाराष्ट्र में आईएएस अधिकारी के रूप में तथा दूसरी बहन विधि चौधरी गुजरात में आईपीएस अधिकारी के रूप में सेवाएं दे रही हैं।

- 2 साल पहले मेड़ता की मुदिता शर्मा व खुडख़ुड़ा की मैना खुडख़ुडिय़ा ने आईएएस परीक्षा उत्तीर्ण की।

- परबतसर क्षेत्र के छोटे गांव की रहने वाली दिव्यकृति सिंह को दो साल पहले महिला घुड़सवारी में अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है।

- डीडवाना क्षेत्र के डाकीपुरा गांव की सुनीता ढाई साल पहले चांद पर सफलतापूर्वक भेजे गए चंद्रयान-3 की टीम का हिस्सा बनी।

- परबतसर के ही खानपुर गांव की 20 वर्षीय रक्षिता राठौड़ ने गत वर्ष भारतीय नौसेना में सब लेफ्टिनेंट बनकर एक रिकॉर्ड बनाया।

 

कुचामन सिटी के निकटवर्ती परेवड़ी गांव की बेटी, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निर्मला भाटी बावरी का नाम खो-खोल खेल में अर्जुन अवार्ड के लिए नामित हुआ है। वर्ष 2025 के प्रतिष्ठित अर्जुन अवॉर्ड के लिए राजस्थान के तीन खिलाडिय़ों को नामित किया गया है, जिनमें एक नाम अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निर्मला भाटी का है। निर्मला भाटी केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि भारतीय खो-खो की रणनीतिक पहचान बन चुकी हैं। उनके नेतृत्व और संतुलित खेल ने भारत को विश्व चैंपियन बनाने में निर्णायक योगदान दिया। निर्मला ने सीमित संसाधनों के बीच संघर्षपूर्ण राह तय की। एशियन चैंपियनशिप से लेकर नेपाल-भारत सीरीज और वल्र्ड कप तक, निर्मला ने हर मंच पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर यह साबित किया कि भारतीय महिलाएं किसी भी खेल में पीछे नहीं हैं।

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