Edited By Anil Jangid, Updated: 16 Mar, 2026 02:26 PM

नागौर: नागौर जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पंडित जेएलएन राजकीय जिला चिकित्सालय की सेंट्रल लैब को अस्पताल परिसर से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थापित करने की तैयारी ने चिकित्सा व्यवस्था को लेकर नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस फैसले से मरीजों के साथ-साथ...
नागौर: नागौर जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पंडित जेएलएन राजकीय जिला चिकित्सालय की सेंट्रल लैब को अस्पताल परिसर से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थापित करने की तैयारी ने चिकित्सा व्यवस्था को लेकर नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस फैसले से मरीजों के साथ-साथ मेडिकल छात्रों और डॉक्टरों को भी गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
बताया जा रहा है कि एनएचएम के मिशन निदेशक और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के संयुक्त शासन सचिव के आदेशों की पालना का हवाला देते हुए जेएलएन अस्पताल के पीएमओ डॉ. आरके अग्रवाल की ओर से सेंट्रल लैब को एमसीएच विंग के पास स्थानांतरित करने का आदेश जारी किया गया है। खास बात यह है कि यह आदेश मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को औपचारिक रूप से सूचित किए बिना ही जारी कर दिया गया, जिससे प्रशासनिक समन्वय पर भी सवाल उठ रहे हैं।
गौरतलब है कि जेएलएन अस्पताल जिले का सबसे बड़ा सरकारी चिकित्सा केंद्र है, जहां रोजाना करीब 900 से 1000 मरीज ओपीडी और आईपीडी में इलाज के लिए पहुंचते हैं। वहीं एमसीएच विंग में प्रतिदिन लगभग 300 से 400 मरीज ही आते हैं। ऐसे में सेंट्रल लैब को मुख्य अस्पताल से पांच किलोमीटर दूर स्थापित करने का निर्णय मरीजों के लिए बड़ी परेशानी बन सकता है।
डॉक्टरों और विशेषज्ञों का कहना है कि कई गंभीर मामलों में ऑपरेशन या इमरजेंसी इलाज के दौरान तत्काल जांच रिपोर्ट की जरूरत होती है। यदि लैब अस्पताल परिसर में नहीं होगी तो जरूरी जांच में देरी हो सकती है, जिससे मरीजों के उपचार पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है।
इस फैसले से मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी असर पड़ सकता है। एमबीबीएस के अलावा नर्सिंग, डीएमएलटी और इंटर्नशिप कर रहे डॉक्टरों को सेंट्रल लैब में प्रैक्टिकल प्रशिक्षण दिया जाता है। लेकिन प्रस्तावित नई लैब पांच किलोमीटर दूर होने के कारण विद्यार्थियों को नियमित प्रशिक्षण में परेशानी आ सकती है। साथ ही यह भी चर्चा है कि नए परिसर में पर्याप्त जगह और सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि मेडिकल कॉलेज के लिए सेंट्रल लैब का अस्पताल से जुड़ा होना जरूरी होता है। यदि लैब को अलग स्थान पर स्थापित किया जाता है या पीपीपी मोड पर संचालित किया जाता है तो नेशनल मेडिकल कमीशन के निरीक्षण के दौरान कॉलेज की मान्यता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।
फिलहाल इस निर्णय को लेकर डॉक्टरों, मेडिकल छात्रों और आम लोगों में चिंता बढ़ रही है, जबकि जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से इस मामले पर अभी तक स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है।