Edited By Anil Jangid, Updated: 04 Mar, 2026 12:46 PM

नागौर। पंजाब से आने वाली इंदिरा गांधी मुख्य नहर में 20 मार्च से नहरबंदी लागू होने जा रही है, जिससे नागौर और बीकानेर जिलों में पेयजल संकट गहराने की आशंका है। नहर में साफ-सफाई और मरम्मत कार्य के चलते इसे 3 मई तक, यानी 45 दिनों के लिए बंद रखने की घोषणा...
नागौर। पंजाब से आने वाली इंदिरा गांधी मुख्य नहर में 20 मार्च से नहरबंदी लागू होने जा रही है, जिससे नागौर और बीकानेर जिलों में पेयजल संकट गहराने की आशंका है। नहर में साफ-सफाई और मरम्मत कार्य के चलते इसे 3 मई तक, यानी 45 दिनों के लिए बंद रखने की घोषणा की गई है। आवश्यकता पड़ने पर यह अवधि 60 दिन तक बढ़ाई जा सकती है।
नहरबंदी का मुख्य कारण पंजाब स्थित फिरोजपुर फीडर का पुनर्निर्माण और मरम्मत कार्य है। इस अवधि में नागौर और डीडवाना-कुचामन जिलों की पेयजल व्यवस्था पूरी तरह वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भर रहेगी। वर्तमान में बीकानेर के नोखा दैया डेम में लगभग 10 हजार मिलियन लीटर से अधिक पानी संग्रहित है, जो करीब 30 दिन की आपूर्ति के लिए पर्याप्त माना जा रहा है।
नहरी परियोजना के अधीक्षण अभियंता पी.एस. तंवर के अनुसार, डेम की कुल क्षमता 10,110 एमएलडी है और विभाग का मुख्य फोकस जल भंडारण को संतुलित बनाए रखने पर है। हालांकि घोषित नहरबंदी 45 दिन की है और जल भंडारण 30 दिन का ही है, ऐसे में जल प्रबंधन विभाग के सामने आपूर्ति संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती होगा।
स्थिति को देखते हुए जिले के सभी नलकूपों और हैंडपंपों को सक्रिय करने के निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जोनवार टीमें गठित की गई हैं, जो हैंडपंपों की मरम्मत और नलकूपों के संचालन की निगरानी करेंगी। आवश्यकता पड़ने पर इन वैकल्पिक स्रोतों का पूरा उपयोग किया जाएगा।
फिलहाल दोनों जिलों में तीन से चार दिन के अंतराल से पानी सप्लाई की जा रही है, जबकि डीडवाना-कुचामन के कुछ क्षेत्रों में यह अंतराल सात दिन तक पहुंच चुका है। अधिकारियों का कहना है कि आमजन को कम से कम परेशानी हो, इसके लिए समन्वित रणनीति बनाई गई है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।