Edited By Anil Jangid, Updated: 14 Jan, 2026 04:05 PM

झुंझुनूं। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर झुंझुनूं की फिजाओं में मंगलवार सुबह एक अलग ही उत्सवधर्मी माहौल देखने को मिला। बीते 48 घंटों से शहर को जकड़े हुए घने कोहरे के छंटते ही जैसे आसमान ने भी राहत की सांस ली और इसके साथ ही पतंगबाजों का उत्साह चरम पर...
झुंझुनूं। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर झुंझुनूं की फिजाओं में मंगलवार सुबह एक अलग ही उत्सवधर्मी माहौल देखने को मिला। बीते 48 घंटों से शहर को जकड़े हुए घने कोहरे के छंटते ही जैसे आसमान ने भी राहत की सांस ली और इसके साथ ही पतंगबाजों का उत्साह चरम पर पहुंच गया। साफ नीला आसमान और 10 से 12 किलोमीटर प्रति घंटे की हल्की पछुआ हवा ने पतंग उड़ाने के लिए बिल्कुल अनुकूल परिस्थितियां बना दीं। नतीजतन, पूरे शहर में रंग-बिरंगी पतंगों से आसमान पट गया और हर ओर “वो काटा… वो काटा” की गूंज सुनाई देने लगी।
सुबह से छतों पर उमड़ा जनसैलाब
अलसुबह होते ही मोड़ा पहाड़, चूरू रोड, कलेक्ट्रेट इलाका सहित शहर के लगभग हर मोहल्ले की छतों पर चहल-पहल शुरू हो गई। कुछ ही देर में झुंझुनूं की छतें किसी बड़े स्टेडियम का रूप लेती नजर आईं। डीजे पर बजते बॉलीवुड गाने, लोकधुनें और पतंग कटने पर उठता शोर पूरे शहर को उत्सव के रंग में रंग रहा था। परिवार के बच्चे, युवा और बुजुर्ग—सभी एक साथ इस पर्व का आनंद लेते दिखे।
महिलाओं की भी रही दमदार भागीदारी
इस बार पतंगबाजी का रोमांच सिर्फ पुरुषों तक सीमित नहीं रहा। बड़ी संख्या में महिलाएं भी पूरे जोश के साथ छतों पर नजर आईं। कोई कन्नी बांधने में जुटी दिखी तो कोई चरखी थामे अपने साथी का उत्साह बढ़ाती रही। कई गृहणियों ने बताया कि उन्होंने सुबह रसोई का काम जल्दी निपटाकर पूरा दिन पतंगबाजी के नाम कर दिया है।
धर्म, दान और मनोरंजन का संगम
मकर संक्रांति पर पतंगबाजी के साथ-साथ दान-पुण्य की भी विशेष झलक देखने को मिली। सुबह 5 बजे से ही मंदिरों और गौशालाओं में श्रद्धालुओं की कतारें लग गईं। लोगों ने गायों को गुड़ और लापसी खिलाई तथा जरूरतमंदों को तिल के लड्डू और अन्य सामग्री दान की। छतों पर गरमा-गरम पकौड़ों और चाय के दौर भी चलते रहे, जिससे त्योहार का आनंद दोगुना हो गया।
बच्चों और युवाओं में खास उत्साह
बच्चों के बीच तिरंगा पतंग और कार्टून कैरेक्टर वाली पतंगें खास आकर्षण का केंद्र रहीं, जबकि युवा पतंगबाजी में पेंच लड़ाने और अपनी कला दिखाने में व्यस्त नजर आए। बाजारों में भी सुबह से पतंग और मांझे की खरीदारी जोरों पर रही। कुल मिलाकर, मकर संक्रांति पर झुंझुनूं शहर की हर गली, हर छत और हर दिल में उत्सव का रंग नजर आया। कोहरे के बाद निकली धूप और पतंगों से सजा आसमान इस पर्व को झुंझुनूंवासियों के लिए यादगार बना गया।