Edited By Anil Jangid, Updated: 28 Jan, 2026 02:10 PM

जालोर। जालोर के पूर्व MLA रामलाल मेघवाल का लंबी बीमारी के बाद बुधवार को निधन हो गया. अहमदाबाद में उनका कैंसर का इलाज चल रहा था. उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे जिले सहित मारवाड़ के राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई. पूर्व विधायक का अंतिम संस्कार...
जालोर। जालोर के पूर्व MLA रामलाल मेघवाल का लंबी बीमारी के बाद बुधवार को निधन हो गया. अहमदाबाद में उनका कैंसर का इलाज चल रहा था. उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे जिले सहित मारवाड़ के राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई. पूर्व विधायक का अंतिम संस्कार गुरुवार को उनके पैतृक गांव रेवाड़ा में किया जाएगा. पूर्व MLA ने जालोर विधानसभा क्षेत्र से सात बार विधानसभा चुनाव लड़ा था. वो 2008 से 2013 तक MLA रहे। वह 2024 में BJP में शामिल हुए थे। वह पिछले एक साल से लगातार बीमार थे.
खबर है कि पिछले 15 दिन से उनकी तबीयत ज्यादा खराब होने लगी थी, जिसपर उन्हें इलाज के लिए जोधपुर लाया गया था. हालत में सुधार न होने के चलते उन्हें वहां से अहमदाबाद ले जाया गया,जहां 7 दिन तक इलाज चला. मंगलवार को उनकी इच्छा के अनुसार मंगलवार शाम को उनके पैतृक गांव रेवतड़ा लाया गया. जहां बुधवार सुबह उन्होंने अपने गांव में ही अंतिम सांस ली. परिवार के लोगों ने बताया कि उनकी इच्छा था कि अंतिम दर्शन और परिवार के लोगों के आने के बाद ही उनका अंतिम संस्कार होना चाहिए. इस पर गुरुवार रेवतड़ा गांव में दोपहर 3 बजे अंतिम यात्रा निकाली जाएगी.
रामलाल मेघवाल ने अपने राजनीतिक जीवन का अधिकतर समय कांग्रेस पार्टी के साथ बिताया. इसके बाद उन्होंने 2024 में भाजपा का दामन थामा. उससे पहले कांग्रेस में रहते हुए उन्होंने बूथ लेवल से लेकर विधानसभा तक का लंबा सफर तय किया. जनता के भरोसे और संगठन की ताकत के दम पर वे एक बार जालोर विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए. इसके बाद उन्होंने विधानसभा में जालोर जिले की बुनियादी समस्याओं को राज्य स्तर पर जोरदार तरीके से उठाया. वे ग्रामीण इलाकों में सड़क, पानी, बिजली और शिक्षा के लिए लगातार लड़ते रहे. उन्होंने कमजोर तबके के लोगों के हक के लिए आवाज उठाई.
दशकों तक कांग्रेस में एक्टिव रहने के बाद रामलाल मेघवाल वर्ष 2024 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए थे. हालांकि, पार्टी बदलने के बाद भी उनके जनसंपर्क और जालोर के प्रति उनकी प्रतिबद्धता में कोई कमी नहीं आई. वे अक्सर कहते थे कि *"पार्टी बदल सकती है, लेकिन जनता के प्रति मेरी जिम्मेदारी कभी नहीं बदलेगी।"* यही कारण था कि भाजपा में जाने के बाद भी उन्हें हर वर्ग का उतना ही सम्मान मिलता रहा.