Edited By Anil Jangid, Updated: 18 Jan, 2026 05:46 PM

जालोर: जालोर जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय से जुड़ा एक गंभीर डेपुटेशन घोटाला सामने आया है। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर मनचाही जगहों पर डेपुटेशन दिलाने के नाम पर कई नर्सिंग अधिकारियों से 10 से 20 हजार रुपए तक की...
जालोर: जालोर जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय से जुड़ा एक गंभीर डेपुटेशन घोटाला सामने आया है। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर मनचाही जगहों पर डेपुटेशन दिलाने के नाम पर कई नर्सिंग अधिकारियों से 10 से 20 हजार रुपए तक की रिश्वत वसूली गई। जब ये डेपुटेशन ज्वाइंट डायरेक्टर (जेडी) कार्यालय की जांच में नियम विरुद्ध पाए गए और 28 मार्च को निरस्त कर दिए गए, तब इस पूरे मामले का खुलासा हुआ।
पीड़ित नर्सिंग अधिकारियों ने पीएमओ को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि उनसे डेपुटेशन के बदले पैसे लिए गए थे, लेकिन बाद में न तो काम हुआ और न ही राशि लौटाई गई। शिकायत में नर्सिंग ऑफिसर सुखराम पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि सुखराम ने खुद को प्रभावशाली बताते हुए सीएमएचओ डॉ. भैराराम जाणी का नाम लिया और मनचाहे अस्पतालों में डेपुटेशन की गारंटी दी। इसी भरोसे पर नर्सिंग अधिकारियों से रकम वसूली गई।
जिला अस्पताल में कार्यरत नर्सिंग अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि 24 फरवरी 2025 को सुखराम ने उनसे 10 हजार रुपए लेकर गांव की पीएचसी में डेपुटेशन दिलाने का भरोसा दिया। उसी दिन आदेश क्रमांक 788 जारी कर उन्हें रानीवाड़ा के गांग में लगाया गया, लेकिन 28 मार्च को यह आदेश नियम विरुद्ध बताते हुए रद्द कर दिया गया।
इसी तरह, नर्सिंग अधिकारी हितेश कुमार ने शिकायत में बताया कि 19 फरवरी को सुखराम ने फोन कर झाब पीएचसी में डेपुटेशन का प्रस्ताव दिया और 20 हजार रुपए की मांग की। अगले दिन राशि देने के बाद उसी शाम डेपुटेशन आदेश जारी कर दिया गया, लेकिन बाद में उसे भी निरस्त कर दिया गया। अब दोनों अधिकारियों ने अपनी पूरी राशि वापस दिलाने की मांग की है।
इस मामले में एक बड़ा पेंच यह भी सामने आया है कि सीएचसी और पीएचसी के कार्मिक CMHO के अधीन होते हैं, जबकि जिला अस्पताल के कार्मिक सीधे पीएमओ के अधीन रहते हैं। इसके बावजूद सांचौर जिला अस्पताल में कार्यरत छह नर्सिंग अधिकारियों के डेपुटेशन CMHO कार्यालय से किए गए, जिन्हें बाद में नियम विरुद्ध मानते हुए रद्द कर दिया गया।
आरोपों पर नर्सिंग ऑफिसर सुखराम ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उन्होंने किसी से कोई पैसा नहीं लिया। वहीं, CMHO डॉ. भैराराम जाणी ने कहा कि यह शिकायत दबाव में लिखवाई गई थी। हालांकि, इस पूरे प्रकरण ने CMHO कार्यालय की कार्यप्रणाली, डेपुटेशन प्रक्रिया की पारदर्शिता और भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें प्रशासन की जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।