Edited By Anil Jangid, Updated: 02 Jan, 2026 07:59 PM

जयपुर। डिजिटल युग में बढ़ते साइबर खतरों के बीच राजस्थान पुलिस ने अपराधियों के विरुद्ध एक निर्णायक युद्ध छेड़ दिया है। महानिदेशक पुलिस राजीव शर्मा के निर्देशन में साइबर क्राइम शाखा को आधुनिक संसाधनों से लैस करने का परिणाम अब आंकड़ों में साफ नजर आने...
जयपुर। डिजिटल युग में बढ़ते साइबर खतरों के बीच राजस्थान पुलिस ने अपराधियों के विरुद्ध एक निर्णायक युद्ध छेड़ दिया है। महानिदेशक पुलिस राजीव शर्मा के निर्देशन में साइबर क्राइम शाखा को आधुनिक संसाधनों से लैस करने का परिणाम अब आंकड़ों में साफ नजर आने लगा है। वर्ष 2025 में राजस्थान ने न केवल साइबर अपराधियों के नेटवर्क को ध्वस्त किया, बल्कि ठगी गई राशि को फ्रीज करवाने के मामले में देशभर में 5वां स्थान हासिल कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
2.5 लाख मोबाइल नंबर और IMEI ब्लॉक
उपमहानिरीक्षक पुलिस साइबर क्राइम विकास शर्मा ने बताया कि राजस्थान पुलिस ने वर्ष 2025 को अभियानों के नाम कर दिया। ऑपरेशन म्यूल अकाउंट एवं पीओएस, साइबर शील्ड, एंटी वायरस और ऑपरेशन वज्र प्रहार जैसे सुनियोजित अभियानों के माध्यम से राज्य के कोने-कोने में छिपे साइबर ठगों पर नकेल कसी गई। इस दौरान तकनीकी टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए करीब 2.5 लाख संदिग्ध मोबाइल नंबर और IMEI ब्लॉक किए। इतना ही नहीं म्यूल अकाउंट्स की पहचान कर उन्हें फ्रीज किया गया, जिससे अपराधियों के लेन-देन के रास्ते बंद हो गए।
आंकड़ों की गवाही: एफआईआर में कमी और रिकवरी में भारी उछाल
पुलिस की सक्रियता का असर धरातल पर दिख रहा है। वर्ष 2024 और 2025 के तुलनात्मक आंकड़ों के अनुसार जहाँ एक ओर कुल दर्ज शिकायतों में 27.7% की वृद्धि हुई है (2024 में 1,00,032 से बढ़कर 2025 में 1,27,713), वहीं दूसरी ओर पुलिस की प्रभावी कार्रवाई के चलते कुल एफआईआर में 19.7% की कमी दर्ज की गई है। इसके साथ कुल धोखाधड़ी की राशि 795.9 करोड़ (2024) से घटकर 768.7 करोड़ (2025) रह गई है, जो कि 3.4% की गिरावट दर्शाती है। सबसे उल्लेखनीय सफलता ठगी गई राशि को रिकवर करने में मिली है, जहाँ लियन/होल्ड की गई राशि में 71.3% की भारी बढ़ोत्तरी हुई है,यह राशि 2024 के 104.6 करोड़ रुपये के मुकाबले 2025 में बढ़कर 179.15 करोड़ रुपये तक पहुँच गई है।
41 जिलों में विशेष थाने सक्रिय
राज्य के सभी 41 राजस्व जिलों में अब पूर्णतः क्रियाशील साइबर पुलिस थाने मौजूद हैं। इसके साथ ही प्रदेश के हर स्थानीय पुलिस थाने में साइबर हेल्पडेस्क स्थापित की गई है, ताकि पीड़ित को शिकायत के लिए भटकना न पड़े। हेल्पलाइन 1930 पर तैनात विशेषज्ञों की टीम 24 घंटे कॉल रिसीव कर तत्काल बैंकिंग ट्रांजेक्शन को रोकने का काम कर रही है।
व्हाट्सएप हेल्पलाइन और मीडिया एडवाइजरी
पुलिस ने फर्जी सिम विक्रय, बैंकिंग मिलीभगत डिजिटल अरेस्ट और ई-मित्र दुरुपयोग जैसी नई ठगी की तकनीकों से जनता को बचाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाया है। आमजन की सुविधा के लिए दो विशेष व्हाट्सएप नंबर 9256001930 और 9257510100 भी जारी किए गए हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से लगातार जारी एडवाइजरी के कारण लोग अब पहले से कहीं अधिक सतर्क हुए हैं।
जरूरी सूचना: यदि आप या आपका कोई परिचित साइबर ठगी का शिकार होता है, तो बिना देरी किए 1930 पर कॉल करें या साइबर हेल्पलाइन नंबर और cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।