जयपुर बुकमार्क के चौथे दिन प्रकाशन के भविष्य, क़ानूनी चुनौतियों और कहानी कहने की बदलती कला पर मंथन

Edited By Anil Jangid, Updated: 19 Jan, 2026 12:45 PM

day four of jaipur bookmark explores the future of publishing

जयपुर। ब्लूवन इंक द्वारा प्रस्तुत जयपुर बुकमार्क, जो जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल के साथ आयोजित हो रहा है, के चौथे दिन वैश्विक प्रकाशन उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों ने भविष्य की दिशा, क़ानूनी पहलुओं, अनुवाद और कहानी कहने की कला पर गहन चर्चा की। दक्षिण एशिया...

जयपुर। ब्लूवन इंक द्वारा प्रस्तुत जयपुर बुकमार्क, जो जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल के साथ आयोजित हो रहा है, के चौथे दिन वैश्विक प्रकाशन उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों ने भविष्य की दिशा, क़ानूनी पहलुओं, अनुवाद और कहानी कहने की कला पर गहन चर्चा की। दक्षिण एशिया के इस प्रमुख प्रकाशन सम्मेलन में प्रकाशक, संपादक, साहित्यिक एजेंट, लेखक, अनुवादक और अकादमिक जगत से जुड़े प्रतिनिधि एक मंच पर एकत्र हुए।

 

दिन की शुरुआत “द फ़्यूचर ऑफ़ बुक्स: रीइमैजिनिंग नैरेटिव्स” सत्र से हुई, जिसमें डेल्फ़िन क्लो, जोसेलिन अज़ोरिन-लारा और मायलीस वातेरिन ने स्वाति चोपड़ा के साथ संवाद किया। इस अवसर पर फ़्रेंच इंस्टिट्यूट इन इंडिया के निदेशक ने “फ़्रेंच–इंडियन ईयर ऑफ़ इनोवेशन” की घोषणा की। चर्चा में अधिकारों, नैतिकता और अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक संबंधों में लेखकों व पाठकों के सम्मान को केंद्रीय विषय बताया गया। मैट्रियोश्काज़ टीम की प्रस्तुति ने किताब से स्क्रीन तक के रूपांतरण और प्रकाशन व फ़िल्म उद्योग के बदलते रिश्तों को उजागर किया। साथ ही एआई के प्रभाव और कॉपीराइट से जुड़ी चुनौतियों पर भी विचार हुआ।

 

“कॉन्ट्रैक्ट्स: रीडिंग द फ़ाइन प्रिंट” सत्र में अमृता त्रिपाठी और ध्रुव सिंह ने हेमाली सोढ़ी के साथ प्रकाशन अनुबंधों की जटिलताओं को सरल भाषा में समझाया। अनुबंध की अवधि, क्षेत्रीय अधिकार, फ़ॉर्मैट, वारंटी और कॉपीराइट जैसे विषयों के साथ-साथ एआई के दौर में सामग्री के उपयोग और अनुवाद अधिकारों से जुड़े नए क़ानूनी सवालों पर भी चर्चा हुई।

 

अनुवाद के क्षेत्र में अरुणाव सिन्हा और विवेक शानभाग ने सांस्कृतिक संदर्भ, शब्द चयन और दार्शनिक गहराई को बनाए रखने की चुनौतियों पर बात की। उन्होंने वितरण, भुगतान और मार्केटिंग की समस्याओं के साथ-साथ नई पीढ़ी के अनुवादकों के प्रशिक्षण की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

 

चौथे दिन का प्रमुख आकर्षण “ये दिल मांगा मोर: आर्ट एंड एनीमे फ्रॉम जापान” सत्र रहा, जिसमें प्रसिद्ध मांगा कलाकार योशितोकी ओइमा और संपादक योशिआकी कोगा ने राधिका झा के साथ संवाद किया। चर्चा में मांगा के विकास, उसकी वैश्विक लोकप्रियता, एनीमे और मर्चेंडाइज़ तक विस्तार तथा एआई के प्रभाव पर प्रकाश डाला गया।

 

दिन के समापन पर जयपुर बुकमार्क ने एक बार फिर प्रकाशन जगत के लिए संवाद, सहयोग और नवाचार के महत्वपूर्ण मंच के रूप में अपनी भूमिका को रेखांकित किया।

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